Tuesday, July 8, 2014

क्या वाकई हम तैयार हैं ..??

क्या वाकई हम तैयार हैं ..??

बहावी विचारधारा वाले सुन्नी संगठन ISIS आधे इराक पर कब्जा जमा लिया। अपनी अदभुत छापामार युद्ध प्रणाली की वजह से इराकी सेना को हराने वाले इन कट्टरपंथियों का इराक अभियान कोई जोश में उठाया कदम नहीं है। ध्यान देने वाली बातें यह हैं कि कट्टरपंथियों के अति-आधुनिक हथियार और आपसी तारतम्यता व समझ यह सिद्ध करते हैं कि इस अभियान की तैयारी एक-दो दिन की नहीं महीनों की है। जिस तरीके से कट्टरपंथी उत्तरी इराक को जीतकर राजधानी बगदाद की ओर बढ़ रहे हैं वह साबित करता है कि यह पूर्व-सुनियोजित है।

एक बात और गौरतलब है कि सीरिया, इजिप्ट, सऊदी अरब, अफगानिस्तान और कई देशों से के सुन्नी कट्टरपंथी एक संगठन के झण्डे तले आ खड़े हुए हैं और इकठ्ठे हो रहे हैं... इन सबके बीच अगर किसी देश को अपनी सुरक्षा के लिए फ्रिकमन्द होना होगा तो वह भारत होगा क्यूँकि धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो भारत हमेशा से ही इस्लामिक आतंकियों के निशाने
पर रहा है और हाल में ही अल-कायदा धमकी दे चुका है कि जल्द इराक जैसे काफिले भारत भेजे जायेंगे।

इराकी संकट से भारत को सबक सीखने की जरूर है। जहाँ तक भारतीय सेनाओं का प्रश्न है उनका छापामार युद्ध से आज तक पाला नहीं पड़ा और वो भी ऐसे से तो कभी नहीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने लिट्टों के प्रश्न पर पचास हजार सैनिक जाफना प्रायद्वीप में भेजे थे लेकिन लिट्टों की छापामार युद्ध तकनीक से भारतीय सेना को बहुत हानि उठानी पड़ी थी। यह बहावी सुन्नी कट्टरपंथी छापामार युद्ध में माहिर, अति-आधुनिक हथियारों से लैस हैं और धार्मिक रूप से जन्नत जाने को लालायित है। विचारणीय प्रश्न तो यह है कि हमारी सेनाएँ कितनी तैयार हैं?

अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए तो इराकी महिलाओं और बच्चों तक ने हथियार उठा लिये है, अगर भारत में कभी ऐसी कोई परिस्थिति बनती है तो हम तो वो भी नहीं उठा सकते। इराक में तो घर-घर में ऐके 47 और ACR मिल जायेंगी, जिन्हे वे बखूबी चलाना जानते हैं लेकिन हमारे यहाँ तो हथियार के नाम लाठियाँ, हाकियाँ और ज्यादा से ज्यादा देशी-तमन्चे ही मिल सकते है और रही बात हमारी पुलिस की तो वह इतनी सक्षम ही नहीं है कि एक उठाईगीरे को पकड़ ले, प्रशिक्षित आतंकियों को रोकना तो दूर की बात है।

देखा था ना 26/11 के हमले में तेरह हमलावरों के सामने भारत की तेज-तर्रार मुम्बई पुलिस घुटनों के बल रेंगती नजर आयी थी। पूरे दो दिन बाद सेना ने ही मोर्चा सम्भाला और आतंकियों को मार गिराया गया था। यही हमला अगर न्यूयार्क पर हुआ होता तो हमलावरों को अमेरिका की SWAT पुलिस ही मिनटों में धूल चटा चुकी होती, आर्मी तो दूर की बात है। हमारी पुलिस से बेहतर तो पाकिस्तान पुलिस है जिनको ट्रेनिंग आर्मी देती है और आतंकी हमले से लेकर बन्धकों को मुक्त करवाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है।

खैर भारत की सुरक्षा अब जिनके हाथों में उनको भारत की सुरक्षा को लेकर चिन्ता तो करनी ही चाहिए और साथ में भारतीय सेना से घरेलू पुलिस तक को आधुनिक बनाने की जरूरत है।भारत की सुरक्षा एकमात्र सेना की जिम्मेदारी नहीं है, इसके लिए इजरायल से सबक सीखने की जरूरत है।

No comments:

Post a Comment

150000 cows to be killed

http://indianexpress.com/article/world/new-zealand-to-kill-150000-cows-to-end-bacterial-disease-5194312/ VEDIC HUMPED COW IS NEVER INFECT...