Saturday, September 15, 2018

150000 cows to be killed

http://indianexpress.com/article/world/new-zealand-to-kill-150000-cows-to-end-bacterial-disease-5194312/

VEDIC HUMPED COW IS NEVER INFECTED WITH SUCH DISEASES LIKE MYCOPLASMA BOVIS ,MAD COW DISEASE OR MIDDLE EAR INFECTIONS ..

ONLY HUMPLESS WESTERN COWS ARE INFECTED... THESE COWS ARE WORSE THAN PIGS..

DESH DROHI VEGGHESE KURIAN SWITCHED OUR PRICELESS HUMPED COW WITH USELESS HUMPLESS COWS..

ROTHSCHLDs APCO BRANDED PM MODI KEEPS PRAISING DESH DROHI VERGHESE KURIAN JUST BECAUSE HE WORKED FOR GUJARATI MILK UNITS..LIKE AMUL AND GUJARAT MILK MARKETING FEDERATION...

THE REPUTATION OF GUJARAT AND GUJARATIS IS MORE IMPORTANT FOR GUJJU NO 2 MODI THAN INDIANS AND BHARATMATA AS A WHOLE..

VEDIC HUMPED COWS GIVE US NUTRITIOUS A2 MILK AND PRICELESS URINE AND DUNG..

HUMPLESS JERSEY/ HOLSTEN COWS GIVE TOXIC A1 MILK AND TOXIC URINE/ DUNG...

LIKE HOW UK CULLED ALL THEIR COWS AFTER FOOT AND MOUTH DISEASE AND MAD COW DISEASE , NATIONS AFFECTED WITH EVEN ONE SINGLE COW HAVING MYCOPLASMA BOVIS DISEASE WILL HAVE TO CULL THE ENTIRE POPULATION OF HUMPLESS COWS..

Following depopulation, farms are disinfected and will lie fallow for 60 days after which they can be restocked.

In India thanks to DESH DROHI ( father of white revolution ) we get only toxic A1 milk of humpless cows..

It is a WHITE LIE that milk of Mycoplasma bovis affected cows do NOT infect humans and presents no food safety risk. That there is no concern about eating meat, milk and milk product..

THEY PROPAGATED THE SAME LIE IN UK AND USA.. BOTH MARGARET THATCHER AND RONALD REAGAN DIED OF BRAIN DISEASE..

http://ajitvadakayil.blogspot.in/2013/04/margaret-thatcher-henchwoman-or-heroine.html

http://ajitvadakayil.blogspot.in/2013/12/shocking-legacy-of-mad-cow-disease-capt.html

How does it affect cows:--
untreatable mastitis in dairy and beef cows..
severe pneumonia in up to 32% of infected calves, starting as a hacking cough..
ear infections in calves, the first sign typically being one droopy ear, progressing to ear discharges and in some cases a head tilt..
abortions..
swollen joints and lameness (severe arthritis/synovitis) in all ages of cattle..

Mycoplasma bovis is anaerobic in nature ( died in oxygen ) does not contain any cell wall, and is therefore resistant to penicillin and other beta lactam antibiotics which target cell wall synthesis.

THIS BLOGSITE HAS SEND MESSAGES TO PM MODI , PMO , HEALTH MINISTER ABOUT WORSE THAN PIGS HUMPLESS COWS--MORE THAN 200 TIMES .. THEY HAVE ALL BEEN IGNORED...

THERE SHALL BE PEOPLES RETRIBUTION...THIS WILL GO AGAINST THEM...

http://ajitvadakayil.blogspot.in/2013/07/nutritious-a1-milk-of-vedic-cows-with.html

Friday, September 7, 2018

Bjp बढ़ता कद बदलता रंग

ऐसा कौन सा कार्य है जो कांग्रेस के समय हमने विरोध नही किया, ज्यादातर मामलों में कांग्रेस ने अपना वह कार्य, योजना, कानून आदि रोक दिये।

लेकिन दूसरी और बीजेपी सत्ता में आई और उसने उन सभी कार्यों कार्य को पूरा तुरन्त किया।

विदेशों से आते है यह सब निर्देश कब क्या करना है...??
और यहां की सत्ताधारी पार्टी को निर्णय लेना होता है।

कांग्रेस भी इन कार्यों को आरंभ करती है पारित करवाने का ड्रामा भी करती है लेकिन विपक्ष का विरोध दिखाकर उसको बाद में लटका देती है।

लेकिन बीजेपी वाले
विदेशी आकाओं को तोहफा कबूल करवा करवा कर सारे काम तीव्र गति से लागू करते हैं ।

जैसे कांग्रेस के समय की भरपाई करने का भी Task मिला हुआ हो।

बीजेपी ने अपनी कार्यशैली से यह प्रमाणित कर दिया है कि सबसे बढ़िया जगह विपक्ष है और जंतर मंतर है, वह वहां पर सबसे बढ़िया काम करती है, जिसका भय दिखाकर कांग्रेस विदेशी आकाओं को चकमा देने में सफल रहती है।

परमाणु डील जिस प्रकार मनमोहन ने अटकाई और मोदी ने शर्तें हटाकर आगे बढ़ाई वह अपमानजनक था।
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बंगलादेशी भूमि अधिग्रहण और नागरिकता
पाकिस्तानी हिन्दू और बंगलादेशी हिन्दू की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस गंभीरता दिखाएगी लेकिन बीजेपी दुत्कार कर भगा देती है।
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पाकिस्तान के हिन्दुओ की नागरिकता के संबन्ध में जब हमने याचिका दायर की तब राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह को भी पार्टी बनाया गया था तो दिल्ली उच्च न्यायालय में राष्ट्रपति की और से उस समय अटार्नी जनरल ने आकर आश्वासन दिया कि हम पाकिस्तान से आये हिन्दुओ को वापिस जाने को नही कहेंगे, वे जब तक यहां रहना चाहें रह सकते हैं और यदि यह नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे तो उस पर विचार किया जाएगा।
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मनरेगा का विरोध यह करते थे।

2014 के बाद मनरेगा से प्रेम हो गया।
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जीएमओ ...
कहाँ एक बीटी बैंगन के लिए भाजपा ने विरोध किया, जंतर मंतर पर भी प्रदर्शन हुए, संसद के दोनों सदनों में भी जबरदस्त विरोध भाजपा द्वारा किया गया।

भाजपा जब आई तो बीजेपी ने एक के बाद एक लगातार कई जीएमओ पास किये, बीजेपी ने स्वदेशी मंच की भी सभी सिफारिशों को ignore किया, स्वयं पीएम मोदी और प्रकाश जावडेकर ने जीएम बीजों से कृषि को बहुत उपयोगी बताया।
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नोटबन्दी कांग्रेस द्वारा भी लागू की जा रही थी 1 मार्च 2014 से प्रस्तावित थी जिसे कांग्रेस ने बाद में रोक लिया गया।

8 नबम्बर 2016 के काले दिन को जो आर्थिक आपातकाल जारी किया गया उससे पूरे देश मे लोग खून के आंसू रोने को मजबूर हुए, कटु सत्य यह रहा कि बड़े मगरमच्छ और धनवान हो गए तथा छोटी मछकियाँ तड़पती ही रह गईं।
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आज के फेसबुकियों में से बहुत कम को याद होगा कि 2009 के चुनाव जे समय भी काला धन को मुख्य विषय बनाया गया था, 2014 में भी वही हुआ... काला धन मुख्य विषय बनाया गया।

2014 में पीएम मोदी के नेतृत्व में जब बीजेपी सत्ता में आती है तो काला धन का नाम लेने वालों को नोटबन्दी की आड़ में दुर्दांत यातनाए दी जाती हैं।

काले धन और नोटबन्दी का सबसे भयावह सत्य यह है कि काला धन जो स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, पोलैंड, हांगकांग, मॉरीशस, गुयाना, एंटीगुआ आदि के देशों के विदेशी बैंकों में पड़े धन से ध्यान भटकाने हेतु नोटबन्दी का भय व्याप्त कर दिया गया लेकिन विदेशी बैको में पड़े काले धन में से एक पाई नही लाई गई।

उल्टा देश के नागरिकों पर ही काला धन होने के आरोप लगा कर सबको अपमानित किया गया।

2018 के जुलाई महीने में ही रिपोर्ट आती है कि जितना काला धन 2014 तक स्विस बैंकों में जमा हुआ था 4 वर्ष में ही उसका 50% और बढ़ गया।

3 सप्ताह के अंदर ही एक और रिपोर्ट आती है जिसमें बताया गया कि जो काला धन जमा हुआ था उसमे से इन्ही 3 सप्ताहों में 80% कम हो गया, जो कि स्वाभाविक है कि दूसरे देशो के बैंकों में जमा किये गए।

सवाल आज भी खड़ा है... कि विदेशी बैंकों से काला धन कितना वापिस आया?
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पीएम मोदी ने एक लाल किले जैसा पंडाल बनवाया सितम्बर 2013 में और मनमोहन सिंह द्वारा आधार कार्ड को लागू करने को खूब गरियाया...

भाजपा सत्ता में आकर उसी आधार कार्ड को लागू करवाने में अपने सभी छिद्रों का जोर लगाने में ही 4 साल लगा दिये।
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कांग्रेस द्वारा जीएसटी लागू करने का विरोध बीजेपी द्वारा बड़े स्तर पर किया गया। सबसे मजबूत तर्क यह दिया गया कि छोटे उद्योग बर्बाद हो जाएंगे।

बीजेपी सत्ता में आकर 28% जीएसटी लागू करती है जिससे उद्योग धंधे चहुं और विकास के नए उदाहरण पेश करते हैं और जीडीपी बढ़कर सबसे उच्च स्तर पर पहुंच जाती है। अर्थव्यवस्था को बदहाल कैसे किया जाता है यह झोला छाप अर्थशास्त्रियों से सीखा जाए जिसकी नीतियों का विरोध स्वयं सुब्रहमणियम स्वामी भी करते रहे समय समय पर।
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पेट्रोल डीजल के विषय पर यह सरकार अपने ही नागरिकों के साथ सदैव विश्वासघात करती रही।
सबसे पहले तो इमोशनल ब्लैकमेल करके सब्सिडी छुड़वा दी गई।

2014 के चुनावों के समय बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाये गये, वीडियो बनाये गए, फोटो वायरल किये गए, पेट्रोल डीजल की महंगाई को लेकर ।

2014 के बाद की मोदी सरकार ने, उसके मंत्रियों ने, आईटी सेल ने और गन्धभक्तों ने मिलकर देश की जनता को कुतर्क, उलाहना स्वरूप अपमानित करने का एक कार्यक्रम ही आरम्भ कर दिया।

इंटरनेशनल मार्किट मे लगातार कीमते गिरते रहने के बावजूद मोदी सरकार ने पेट्रोल कीमतों में कोई कमी नही की और देश की जनता को मूर्ख पर मूर्ख बनाते रहे।
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मुसलमानो का विरोध मुख्य हथियार बना मोदी सरकार की स्थापना में।
2009 से 2014 के मध्य कितने आंदोलन हुए दिल्ली समेत अन्यान्य राज्यों में कांग्रेस द्वारा मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को लेकर

सच्चर कमेटी को लागू करने लगी कांग्रेस तो पैट्रियट फोरम के रिटायर्ड आईएस और आईपीएस के समूह ने मिलकर सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर रोक लगवाई।

2014 में बीजेपी सरकार आने के उपरांत बीजेपी ने "नई मुस्कान, नई रोशनी, नया सवेरा, नया आगाज़, उस्ताद, शागिर्द"  आदि 85 से अधिक योजनाओं को लागू किया मुसलमानो के आर्थिक स्तर को उठाने हेतु।

प्रत्येक वर्ष 65 मुस्लिम आईपीएस बनाने की देशविरोधी अनीति मोदी सरकार द्वारा निर्धारित की गई।

योगी सरकार द्वारा मोदी के खास Testicle जफर सरेशवाला को 700 एकड़ जमीन का आवंटन जारी किया गया उत्तर प्रदेश में उर्दू यूनिवर्सिटी खोलने हेतू।

अल्पसंख्यक आयोग की और से पूरे देश मे 5 मुस्लिम युनुवर्सिटी शुरु करने का एलान किया गया जिसमें मुस्लिम लड़कों को 100%, आरक्षण का प्रावधान किया गया (अर्थात गैर मुस्लिम लड़को हेतु शून्य प्रतिशत आरक्षण, कोई प्रवेश नही) और गैर मुस्लिम लड़कियों हेतु 50% आरक्षण का प्रावधान ... साफ शब्दों में एलान किया गया है कि लव जिहाद करो फुल स्पीड पर।
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एफडीआई - विदेशी निवेश

2014 से पहले बीजेपी और संघ विदेशी निवेश का जमकर विरोध करते थे।
लेकिन 2014 के बाद सत्ता प्रप्ति के बाद हर देश मे जा जाकर विदेशी निवेश हेतु हाथ फैलाये गए।

वालमार्ट, अमेज़न, पेटीएम जैसी कम्पनिया भारतीय छोटे दुकानदारों को निगलने हेतु पूरी तरह तैयार बैठी हैं।
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गौ रक्षा और बीफ निर्यात

2014 आए पूर्व गौरक्षा और बीफ निर्यात पर रैलियों में गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाने वाले मोदी जी ने 2014 में सत्ता प्राप्ति के उपरांत ही बड़ा यू-turn लेते हुए बीफ निर्यातकों से चंदा लेकर उनके यांत्रिक कत्लखानों के लिए विदेश से मशीने मंगवाने पर इम्पोर्ट ड्यूटी 40-50%, कम की गई ।

गौरक्षकों को गुंडा कहा गया।

गौसंवर्द्धन के नाम पर देसी गौवों की संकरता बढाने हेतु इजरायल से साण्ड आयात करवाये गए।

बीजेपी ने अपने सभी गौरक्षा विभाग और प्रकोष्ठ बन्द कर दिये।

सेना की 39 गौशालाओं को बंद करवा दिया गया।
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समलेंगिक कानूनों का विरोध 2013, 2014 में जमकर किया गया और आज यही सरकार 2018 में समलैंगिक कानूनों को लागू करवाती है।
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2014 के चुनावों से पूर्व जोर शोर से बंग्लादेशी मुसलमान भगाने की बात की गई।

2014 के बाद  ये बंगलादेशी भगाने की बात करते करते रोहिंग्या मुसलमान बसा गए।

उनके आधार कार्ड जारी किए गए।

हिमाचल प्रदेश बीजेपी सरकार एक टेंडर जारी करके निजी कम्पनी द्वारा उनको बड़े स्तर पर रोजगार उपलब्ध करवाती है।

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स्वदेशी राष्ट्रवाद की मुहिम में लगे सभी राष्ट्रवादियों को यह जानकर निराशा हाथ लगी कि मेक इन इंडिया के नाम और भी देश को मूर्ख बनाया गया ।

2014 से लेकर 2018 तक देश का चीनी आयात 30% से अधिक बढ़ चुका है।

चीनी बैंक खुल रहे हैं।

चीज से हथियार ख़रीदके जा रहे हैं।
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1990 में वीपी सिंह की सरकार के वाजपेयी और आडवाणी मिलकर मण्डल कमीशन को लागू करवाते हैं।

1999 से 2004 के मध्य जब वाजपेयी भी रामसेतु तोड़ने वाले हिन्दू विरोधी कानून पारित करने के बाद हिन्दुत्व के विषयों पर कुछ न कर सके तो जाते जाते अल्पसंख्यक आयोग, मुसलमानो को आरक्षण और प्रमोशन में आरक्षण लागू करने के नए झुनझुने बजा गए ।

2018 में बीजेपी एससी/एसटी एक्ट जैसा अमानवीय असंवैधानिक अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटने हेतु लागू करती है।

हिंदुत्व की रही सही एकता को तोड़ने में भी यह सरकार सफल रही।
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कुल मिलाकर...

हिन्दुत्व के प्रत्येक विषय को नजरअंदाज किया गया ।

कोई 5 कार्य ऐसे नही बता सकता जो भारतीय धर्म, संस्कृति, दर्शन, गुरुकुल, गौशालाओं, गङ्गा और गीता आदि की नीति को लेकर गौरवान्वित करता हो।

बीजेपी ने अपनी कार्यशैली से यह प्रमाणित कर दिया है कि सबसे बढ़िया जगह विपक्ष है और जंतर मंतर है, वह वहां पर सबसे बढ़िया काम करती है, जिसका भय दिखाकर कांग्रेस विदेशी आकाओं को चकमा देने में सफल रहती है।

Sunday, September 2, 2018

स्वरोजगार

#भारत_में_रोजगार : समस्या और समाधान - भाग 1

भारत हजारों वर्षों से  स्वरोजगारियों का देश था। जब तक तुर्क मोघल नही आये थे तब तक वह विश्व की 35% जीडीपी का उत्पादक था।
लेकिन उनके आने लूट खसोट के कारण 1750 आते आते मात्र 24% जीडीपी का उत्पादक बचा। मोघल ने जो भी विनाश किया हो लेकिन कुछ दस्युओं को छोड़कर वे देश की धन दौलत को देश के बाहर नही ले गए।

लेकिन जब विश्वदस्यु ईसाइयो ने कब्जा किया तो भारत की कृषि_शिल्प_वाणिज्य का पूर्णतः विनाश किया जिसके कारण स्वरोजगार ध्वस्त हो गया।
अन्यथा उसके पूर्व भारत का नारा था - "उत्तम खेती मध्यम वान निशिद्धि चाकरी भीख निदान"।
1900 आते आते भारत मात्र 2% जीडीपी का उत्पादक बचा।
आजाद भारत मे नेहरू ने सोशलिस्ट मॉडल इकॉनमी को अपना कर स्वरोजगार का विनाश किया। और पढे लिखे लोगों के सामने रोजगार का एकमात्र रास्ता दिखाया - वह थी नौकरी।
नौकरी के गुण दोष में नही गिना रहा।
लेकिन स्वतंत्र  भारत मे कॉमर्स और स्वरोजगार को नाश करने के लिए कॉमर्स और स्वरोजगार के प्रति निरोधात्मक कानून बनाये गए, और जनता के उसके प्रति हीन भावना पैदा करने हेतु उनका माइंड मैनीपुलेशन किया गया।
उदाहरण स्वरूप यदि आपको कॉमर्स या स्वरोजगार करना है तो आपको जमीन की रजिस्ट्री, बैंक के लोन, गृह कर से लेकर बिजली तक के लिए ज्यादा धन खर्च करना होगा, सरकारी बाबूगिरी की बात छोड़ दो तो भी।

आखिर यह चाहते क्या हैं ? कि कॉमर्स और स्वरोजगार नष्ट हो। और जनता सरकार के ऊपर निर्भर होने को बाध्य हो।

वहीँ यदि आप बीच शहर में एक बीघे बंगले में 20 एयरकंडीशनर वाले बंगले में भी रहिये तो ऊपर वर्णित समस्त क्षेत्रो में आपको कम दामों पर समस्त सुविधाएं मिलेंगी।

तिस पर सबसे पॉपुलर नारा विकास का है जिसके विरोध में यदि आप बोलेंगे तो लोग आपका मुहं नोच लेंगे।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इससे लाभ किसको मिलता है - पॉलिटिशियन, ठेकेदार, बेरोक्रेटे को । और फर्राटेदार सङ्क बन गयी तो उस पर गाड़ियां किसकी दौड़ेंगी ?
कम से कम सड़क के किनारे जिनकी दुकान तोड़ी गयी होंगी, उनकी गाड़ियों की संख्या उन सड़को पर सबसे सबसे कम होंगी।

स्वरोजगार और कॉमर्स विरोधी सरकारी दृष्टिकोण और नीतियों के बाद भी भारत की करंट जीडीपी में किसका कितना योगदान है :
सरकार -18%
कृषि - 18%
कॉरपोरेट - 14%
स्वरोजगारी - 50 %

क्योंकि स्वरोजगार हजारो वर्षो से हमारी जीन्स में है।
इसका उपचार अगली पोस्ट में। आज भी नौकरी पर मात्र एक से दो प्रतिशत भारतीय परिवार जीवित है। और मात्र नौकरी को आधार बनाकर 70 साल से भारत को बांटा और लूटा जा रहा है।

ईस्ट इंडिया कंपनी के समुद्री लुटेरों ने जब भारत मे 1757 मे टैक्स इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी छीनी तो ऐसा कोई भी मौका हांथ से जाने नहीं दिया , जहां से भारत को लूटा जा सकता हो । वही काम पूरी के जगन्नाथ मंदिर मे हुआ । वहाँ पर शासन और प्रशासन के नाम पर , तीर्थयात्रियों से टैक्स वसूलने मे भी उन्होने कोताही नहीं की । तीर्थयात्रियों की चार श्रेणी बनाई गई । चौथी श्रेनी मे वे लोग रखे गए जो गरीब थे । जिनसे ब्रिटिश कलेक्टर टैक्स न वसूल पाने के कारण उनको मंदिर मे घुसने नहीं देता था । ये काम वहाँ के पांडे पुजारी नहीं करते थे, बल्कि कलेक्टर और उसके गुर्गे ये काम करते थे ।
( रेफ - Section 7 of Regulation IV of 1809 : Papers Relating to East India affairs )
इसी लिस्ट का उद्धरण देते हुये डॉ अंबेडकर ने 1932 मे ये हल्ला मचाया कि मंदिरों मे शूद्रों का प्रवेश वर्जित है । वो हल्ला ईसाई मिशनरियों द्वारा अंबेडकर भगवान को उद्धृत करके आज भी मचाया जा रहा है।
ज्ञातव्य हो कि 1850 से 1900 के बीच 5 करोड़ भारतीय अन्न के अभाव मे प्राण त्यागने को इस लिए मजबूर हुये क्योंकि उनका हजारों साल का मैनुफेक्चुरिंग का व्यवसाय नष्ट कर दिया गया था । बाकी बचे लोग किस स्थिति मे होंगे ये तो अंबेडकर भगवान ही बता सकते हैं। वो मंदिर जायंगे कि अपने और परिवार के लिए दो रोटी की व्यवस्था करेंगे ?
आज भी यदि कोई भी व्यक्ति यदि मंदिर जाता हैं और अस्व्च्छ होता है है तो मंदिर की देहरी डाँके बिना प्रभु को बाहर से प्रणाम करके चला आता है। और ये काम वो अपनी स्वेच्छा और पुरातन संस्कृति के कारण करता है , ण कि पुजारी के भय से।
जो लोग आज भी ये हल्ला मचाते हैं उनसे पूंछना चाहिए कि ऐसी कौन सी वेश भूषा पहन कर या सर मे सींग लगाकर आप मंदिर जाते हैं कि पुजारी दूर से पहचान लेता है कि आप शूद्र हैं ?
विवेकानंद ने कहा था - भूखे व्यक्ति को चाँद भी रोटी के टुकड़े की भांति दिखाई देता है।

एक अन्य बात जो अंबेडकर वादी दलित अंग्रेजों की पूजा करते हैं, उनसे पूंछना चाहूँगा कि अंग्रेजों ने अपनी मौज मस्ती के लिए जो क्लब बनाए थे , उसमे भारतीय राजा महराजा भी नहीं प्रवेश कर पाते थे।
बाहर लिखा होता था -- Indian and Dogs are not allowed । मुझे लगता हैं कि उनही क्लबो के किसी चोर दरवाजे से ###ों को अंदर एंट्री अवश्य दी जाती रही होगी ?
ज्ञानवर्धन करें ? ऐसा ही था न ?

IS BRITAIN RULING INDIA “ FOR INDIA’S GOOD ‘” ?
क्या ब्रिटिश भारत पर “भारत के भलाई के लिए” के लिए शासन कर रहा है ?
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"यहाँ ऐसा कुछ नहीं है जैसा की हमे अक्सर सुनने को मिलता है और जो लगातार पूरे विश्व मे घोषित किया जाता है कि ग्रेट ब्रिटेन भारत मे निस्वार्थ उद्देश्यों के कारण “ भारत कि भलाई के लिए “ यहा रह रहा है ; कि ये भारतीयों का  का ट्रस्टी है , जो “ईश्वरीय आदेश “ से भारत की “देखभाल” और “सुरक्षा” के लिए जिम्मेदार है , और इसलिए ये उसका कर्तव्य है कि उनको उनके इक्षा और विरोध के बावजूद गुलाम बना कर रखे और उन पर शासन करे, ; और वो विवादों के बावजूद भी “गोरों के कंधो पर रखा गया बोझ “ को उठा रहा है ; यद्यपि वो उनकी स्वतन्त्रता और स्वराज्य का पक्षधर है लेकिन ये तुच्छ और अज्ञानी लोग है जो अर्धसभ्य बच्चे के समान है, जिनको उच्च किस्म के ब्रिटिश मालिकान की तुलना मे , अपने भले बुरे का ज्ञान नहीं है , इसलिए उनके साथ बच्चों जैसा ही व्योहर करने की  बाध्यता है ; वास्तव मे , उसकी समवेदनाए इनके साथ जुड़ी हुयी है और वह निस्वार्थ भाव से उनको स्वराज्य के लिए शिक्षित कर रहा है , लेकिन ये काम बहुत सावधानी से और धीमे गति से करना पड रहा है क्योंकि अगर इनको तुरत फुरत मे स्वराज दे दिया जाय तो उसके परिणाम इनके लिए घातक  होंगे ।

लेकिन क्या ये एक दिखावा मात्र नहीं है ?

वर्ल्ड अफेयर्स के अमेरीकन विद्वान और इतिहासकर डॉ हेरबेर्ट एडम्स गिब्बंस भारत पर ब्रिटिश शासन के बारे मे अपना निर्णय सुनाते हुये लिखते हैं – “ कैप्टन ट्रोत्तर के “भारत का इतिहास “ या लोवाट फ्रेजर की “ India under Curzon and After “ को पढ़ने से , जब  भारत की बात आती है तो  आप को इन बुद्धिमान अंग्रेजों के Perverted नैतिकता का एहसास होता है । मैं कुछ बहुत ही अच्छे अंग्रेजों को जानता हूँ जिनहोने भारत मे सिविल या मिलिटरी मे अपनी सेवाएँ दी हैं। उनके मन मे कभी भी ये प्रश्न नहीं उठा कि वो भुखमरी से पीड़ित लोगों से उनकी इक्षा के विरुद्ध मोटा वेतन कैसे  ले रहे हैं , या सीमांत के आदिवासियों पर आक्रमण करके उनको गोलियों से भून रहे है , या किस तरह से वो भारतीयों की बेंत से पिटाई करने और उनकी हत्याओं की  निंदा क्यों नहीं कर रहे , जैसा कि वे स्वयम करते यदि उनके साथ कोई ऐसा ही बर्ताव करता तो । भारत के प्रति हो रहे अन्याया की अनदेखी करना ब्रिटिशर्स का  आनुवांशिक दोष है । ब्रिटिशर देशभक्त हैं।  उसको ये विश्वास है कि यदि वो मानवता की सेवा नहीं कर रहा  है तो अपने देश कि तो सेवा कर रहा है । लेकिन यदि वो ब्रिटिश के भारत मे शासन और उसकी उपस्थिति का आंकलन करेगा तो Whiteman ‘s Burden को सहने का क्या अर्थ है , उसको अवश्य समझ मे आएगा।

(1) एक ऐसे बाजार मे अपने समान कि बिक्री करना जहां कोई अन्य प्रतियोगी नहीं है ।
(2) इनवेस्टमेंट की सुविधा और concession के एकाधिकार
(3) पैरोल  पर जाने का अवसर

इस बात का विरोध यह बोलकर किया जा सकता है कि भारत के  व्यवसायिक शोसण के बदले उसको सुशासन प्रदान किया जा रहा है , तो उसका तात्कालिक उत्तर ये होगा कि ब्रिटेन कोई वहाँ लोकोपकारी काम नहीं कर रहा बल्कि इस शासन के बदले मे भारत से वो नकद मोटी रकम लेता है , जो ज़्यादातर अंग्रेजों को  एक अनुकूल और लाभकारी रोजगार देता है, जो उसके लिए दुनिया के किसी हिस्से मे भी प्राप्त नहीं हो सकती" ।

पेज – 68 – 70
J Sunderland

ये पुस्तक 1929 में प्रकाशित हुई थी 32 साल के रिसर्च के बाद।

एक अमेरिकन तथ्य जुटा रहा था।
पूरा भारत अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलित था।

और बाबा साहेब साइमन और लोथियन के साथ ये निर्धारित कर रहे थे कि डिप्रेस्ड और अछूत कौन,  क्यो और कैसे है? अंत में निष्कर्ष निकाला कि 1935 के सरकारी परवाने में चिन्हित 429 जातियों में से मात्र एक जाति ही शास्त्रों के अनुसार अछूत है।
ॐ ।
JOURNEY FROM MADRAS  THROUGH THE COUNTRIES OF MYSORE, CANARA AND MALABAR

हैमिलटन बुचनन की ये पुस्तक 1807 में पब्लिश हुई थी।
1799 में टीपू को हराने के बाद 1800 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनको ईस्ट इंडिया के अधिकार क्षेत्र में दौरा करके उस क्षेत्र की कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, जलवायु , जियोग्राफी, का विस्तार पूर्वक वर्णन करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था।

अभी प्रथम वॉल्यूम का  52 पेज तक पढा है।
वर्ण को वो pure Caste के नाम से संबोधित करते हैं।

पेज 29 पर वेलोर से पिलिगोंडा नामक स्थान की यात्रा का वर्णन है। जहां 1 मई 1800 को पिलिगोंडा मंदिर में एक शोभा यात्रा निकाली गई, बुचनन की आंख के सामने, जिसमे उज़को सीखने को मिला कि उस शोभायात्रा में ब्राम्हण वैश्य और शूद्र वर्ण (Pure Caste) के लोग सम्मिलित हुए। क्षत्रिय उस शोभा यात्रा में नही थे क्योंकि वे समूल नष्ट हो चुके थे। ( हेमिल्टन ने उनको messanger,  robbers, और warriors) में बांटा है)

पेज 29 पर लिखा कि इस्पात का निर्माण Malawanalu समुदाय द्वारा किया जाता है, जिनको मद्रास के निवासी उनके तिलंग भाषा में पेरियार कहते हैं।

पेज 35 पर क्षारीय मिट्टी से नमक बनाने की तकनीक का वर्णन है। ( आधुनिक नमक निर्माता इस तकनीक को आज तक नही खोंज पाये)।

पेज 39 और 40 में वलुरु नामक साप्ताहिक बाजार में गांव गांव में बनने वाले कपड़ो के निर्माण का वर्णन है। जिसमें दो किस्म के कपड़े बनाये जाते थे। मोटे कपड़े देश मे प्रयोग हेतु , और महीन कपड़े विदेश में एक्सपोर्ट करने हेतु, जो व्यापारियों से एडवांस मिलने पर निर्मित किय्ये जाते थे।

पेज 52 पर लिखता है कि हुक्का सिर्फ मुसलमान पीते थे। बीड़ी लोग पीते हैं, लेकिन यदि किसी ब्राम्हण ने बीड़ी पिया तो उसको जात बाहर कर दिया जाएगा।
और धनी शूद्रों में भी यह अच्छा नही माना जाता है।

अभी तक अछूतपन का वर्णन एक बार भी नही आया है।

छोटे तबके, और बड़े तबके की बात अवश्य लिखी है।

लेकिन वो तो अनादिकाल से हर देश और समुदाय में रहे हैं और रहेंगे।

दलित चिन्तक #Karls #बॉयज एंड #गर्ल्स इस रहस्य को समझाएं।

इकॉनोमिक हिस्ट्री तो सबको मुंहजबानी याद ही है।

भारत के बुद्धुजीवियों जिन कारणों से संविधान में कास्ट को समाहित किया गया वह तुम जानते ही होंगे।

संविधान के निर्माता ब्रिटिश एडुकेटेड इनोसेंट इंडियन बरिस्टर्स (BEIIBS) यदि इन तथ्यों को पढ़ लेते तो........
✍🏻
©डॉ त्रिभुवन सिंह

शंकराचार्य और सरसंघचालक एक_तुलनात्मक_अध्ययन

वरिष्ठ आईपीएस चाचाजी  श्री Suvrat Tripathi की कलम से। #शंकराचार्य_और_सरसंघचालक_एक_तुलनात्मक_अध्ययन सनातन धर्म की वर्णाश्रम व्यवस्था के ...