Tuesday, July 29, 2014

सहारनपुर दंगा - दंगाई योजनाबद्ध थे

दंगे की आग से झुलसे यूपी के सहारनपुर में दंगाइयों ने ऐसा कहर बरपाया था कि तबाही का मंजर रोंगटे खड़े करने वाला है।

अंबाला रोड पर शनिवार को सौ से ज्यादा दुकानों में लूटपाट और आगजनी से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

दुकानों के मलबे में टूटे पड़े ताले और वहां पड़ी केमिकल की केनों से साफ है कि दंगाइयों ने लूटपाट के बाद केमिकल डालकर दुकानों में आग लगाई थी।

जली हुई दुकानों के बाहर केमिकल के केन मिलने से साफ है कि दंगाई योजनाबद्ध थे। गुरुद्वारा रोड के निवासियों और व्यापारियों पर उपद्रवियों का कहर इस कदर रहा कि दंगे की बात आते ही वे सिहर जाते हैं।

सोमवार को अंबाला रोड की दुकानों से उठता धुआं और चारों ओर बिखरी राख तीन दिन पहले उन्मादियों के कहर की कहानी बयां कर रहा है।

हर दुकान में लाखों रुपये का माल था और त्योहारी सीजन के लिए व्यापारियों ने स्टॉक फुल किया हुआ था, मगर उन्हें क्या पता था कि उनके खून-पसीने की कमाई दंगाई लूट लेंगे और दुकानों को राख कर जख्म गहरा कर जाएंगे।

कुतुबशेर थाने से शहर की ओर बढ़ने पर सड़क के दोनों तरफ करीब 100 दुकानें दंगाइयों के निशाने पर रहीं। तीन दिन पहले जमीन विवाद को लेकर शुरू हुआ झगड़ा देखते-ही देखते दंगे में तब्दील हो गया था।

दुकानों की राख और मलबे से साफ है कि दंगाई पूरी तैयारी से आए थे और उनका इरादा केवल लूट था।

अंबाला रोड की जिन दुकानों को निशाना बनाया गया, उनमें इलेक्ट्रानिक्स शोरूम, ऑटो मोबाइल, स्पेयर पार्ट्स, बैटरी आदि की दुकानें थीं। कर्फ्यू में ढील के बाद जब व्यापारियों ने दुकानें खोली तो ज्यादातर दुकानों के ताले टूटे हुए थे और वहां केमिकल के केन पड़े मिले। इससे साफ है कि दंगाइयों ने पूरी तैयारी से लूटपाट की।

अंबाला रोड की दुकानों में लूटपाट और आगजनी से व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। चावला इलेक्ट्रानिक्स के मालिक बलजीत चावला ने बताया कि तीन तल के शोरूम में कई लाख का माल था, लेकिन अब केवल राख बची है।

अन्य दुकानों में भी लाखों का माल या मशीनरी थी। दंगाइयों ने लूटपाट के बाद दुकानों की मशीनों में भी तोड़फोड़ की है। ऐसे में माल के साथ दुकानों के जलने से उन्हें करोड़ों का नुकसान हुआ है।

दंगाइयों के कहर के बाद सबसे बड़ा सवाल उठता है ज्वलनशील केमिकल की इतनी बड़ी खेप कहां से आई। जिस तरह आगजनी की गई है, उसमें 50 से ज्यादा केनों का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

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