Tuesday, April 15, 2014

सउदी अरब ने मुसलमानों की सहायता से मना कर दिया


जब सउदी अरब ने भारतीय मुसलमानों की सहायता से मना कर दिया तो नरेंद्र मोदी ने ही उन्‍हें बचाया!


Sundeep DevCategory: आधीआबादी ब्‍लॉगPublished on Tuesday, 15 April 2014 05:33


संदीप देव। सहारनपुर के कांग्रेस प्रत्‍याशी इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी के टुकड़े करने की चेतावनी दी। उसने कहा कि गुजरात में 4 फीसदी मुसलमान हैं, जबकि उनके यहां 42 फीसदी मुसलमान हैं। यहां हम मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। सबसे पहले इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी ने मोदी को 'मौत का सौदागर' कह कर की थी। कांग्रेस ही क्‍यों, ज्‍यादातर राजनैतिक पार्टियां मुस्लिम वोट बटोरने के लिए मुसलमानों को नरेंद्र मोदी के नाम का भय दिखा रही हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण को सेक्‍यूलरिज्‍म का नाम देकर राजनैतिक पार्टियां, पत्रकार और तथाकथित बुद्धिजीवी मुसलमानों को 'पोलिटिकली ब्‍लैकमेल' कर रहे हैं। लेकिन वह देश के मुसलमानों को यह कभी नहीं बताएंगे कि जब सउदी अरब ने उनकी सहायता करने से मना कर दिया था तो नरेंद्र मोदी ही आगे आए थे और उन्‍होंने उनके जान-माल की हिफाजत की थी!



मेरी पुस्‍तक 'साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी' के साथ हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन तनवीर अहमद



इस्‍लाम के मूल स्‍थान वाले देश सउदी अरब ने जब भारतीय मुसलमानों की रक्षा करने से मना कर दिया था तो तथाकथित 'सांप्रदायिक' नरेंद्र मोदी ही उन्‍हें बचाने के लिए आगे आए थे और 6000 मुसलमानों की रक्षा की थी! यह घटना गुजरात दंगा-2002 के समय की है। तब के हज कमेटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन तनवीर अहमद ने चीख-चीख कर उस वक्‍त यह सच्‍चाई वरिष्‍ठ मुस्लिम नेताओं, मीडिया और मुस्लिम नौकरशाहों को बताया था, लेकिन इस पूरे मामले को दबा दिया गया था। यह बात खुद मुझे हज कमेटी ऑफ इंडिया के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष तनवीर अहमद ने बताया। वह लगातार 8 साल तक हज कमेटी ऑफ इंडिया अध्‍यक्ष रह चुके हैं।

जिस वक्‍त गुजरात दंगे में झुलसा हुआ था, उस वक्‍त हज कमेटी के अध्‍यक्ष होने के नाते 18 मार्च से 30 मार्च तक अहमदाबाद एयरपोर्ट पर कंट्रोल रूम बनाकर तनवीर अहमद हज यात्रियों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने में जुटे रहे थे। मुस्लिम समाज से कोई उनकी मदद को नहीं आया। एक मात्र नरेंद्र मोदी ही वह व्‍यक्ति थे जो न केवल राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के नाते, बल्कि इंसानियत के नाते भी एक-एक हज यात्रियों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने के लिए तनवीर अहमद के साथ मिलकर काम कर रहे थे। एक भी हज यात्री दंगे का शिकार नहीं हुआ!

तनवीर अहमद जी से मैं कभी नहीं मिला था। वह 13 फरवरी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित नरेंद्र मोदी पर लिखी मेरी पुस्‍तक 'साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी' के लोकार्पण अवसर पर आए थे और कार्यक्रम के बाद चले गए। एक दिन अचानक वो मुझे भारतीय जनता पार्टी के 11, अशोका रोड कार्यालय में मिल गए। वह वर्तमान में भाजपा के राष्‍ट्रीय कार्यसमिति के सदस्‍य हैं। उन्‍होंने कहा, आपने अपनी पुस्‍तक में हज यात्रियों की सुरक्षा की जो बात लिखी है, उसका नेतृत्‍व तो मैं ही कर रहा था! इतनी बड़ी घटना को उस वक्‍त हिंदी के केवल एक अखबार ने उठाया था और आज भी देश की अधिकांश जनता इस बात से अनजान ही है। वैसे काफी सारी जानकारियां ऐसी है, जिसका पता आज भी देश को नहीं है। मैंने आश्‍चर्य से पूछा क्‍या..?

तनवीर अहमद ने बताया, वर्ष 2002 में गोधरा के बाद गुजरात में दंगे शुरू हो चुके थे। उस वक्‍त मैं हज कमेटी ऑफ इंडिया का अध्‍यक्ष था। हज कमेटी ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष का ओहदा एक केंद्रीय मंत्री के समकक्ष होता है। गुजरात से करीब 6000 मुसलमान हज यात्रा के लिए सउदी अरब गए थे। गुजरात के हालात ठीक नहीं थे। इसलिए भारत सरकार ने दूतावास के जरिए सउदी अरब सरकार से यह निवेदन किया था कि वह कम से कम दो माह के लिए भारतीय मुसलमानों को अपने यहां ठहराने की व्‍यवस्‍था करें। या फिर जब तक गुजरात के हालात ठीक नहीं हो जाते तब तक भारतीय मुसलमानों को अपने यहां रुकने की इजाजत दे। भारत सरकार भारतीय मुसलमानों के ठहरने और उनके खाने-पीने का खर्च उठाने को तैयार थी। लेकिन मुसलमान देश होते हुए भी सउदी अरब ने मुसलमानों की जिम्‍मेवारी लेने से इनकार कर दिया। सउदी सरकार ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में मना करते हुए कहा कि यह भारतीय मुसलमानों को सउदी में रुकने की इजाजत नहीं दे सकती है। उन्‍हें अपने तय समय में ही अपने देश लौटना होगा।

तनवीर अहमद के मुताबिक, उसके बाद मैंने नरेंद्र मोदी से बात की। उन्‍होंने मुझे पूरा सहयोग और सभी भारतीय मुसलमान हज यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने का वचन दिया। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्‍यवस्‍था काफी बढ़ा दी गई। गुजरात सरकार ने वहां तीन कंट्रोल रूम का निर्माण कराया, जहां हज यात्री आकर ठहरते थे और जहां से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाती थी। मैं अकेला 18 मार्च से लेकर 30 मार्च तक एयरपोर्ट पर ही रहा। हज यात्रियों को एयरपोर्ट से सुरक्षित निकाल कर बसों में ले जाया जाता था, जिसकी पूरी सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करती थी। मुझे उसी दौरान महसूस हुआ कि धर्म से कहीं अधिक बड़ा है राष्‍ट्र! यदि धर्म ही बड़ा होता तो कुछ समय के लिए भारतीय मुसलमानों को अपने यहां ठहराने से सउदी अरब मना नहीं करता, लेकिन इस्‍लाम का मूल स्‍थान होते हुए भी सउदी अरब ने इसके लिए मना कर दिया!

वहीं गुजरात के मुख्‍यमंत्री पर हिंदुवादी होने का आरोप लग रहा था, लेकिन उन्‍होंने राष्‍ट्र के नागरिकों की सुरक्षा का ख्‍याल करते हुए उन सभी 6000 हज यात्रियों की न केवल एयरपोर्ट पर सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उन्‍हें सुरक्षित अपने-अपने घरों तक भी पहुंचाया। ये सभी हज यात्री गुजरात के 400 गांवों से हज यात्रा पर गए थे। दंगे के माहौल में 400 गांवों तक एक-एक मुसलमान यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्‍हें घरों तक पहुंचाना इतना आसान नहीं था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे करके दिखाया। मेरा तो स्‍पष्‍ट मानना है कि धर्म से कहीं बड़ा है राष्‍ट्र। और हर मुसलमान से यही अपील करूंगा कि वह राष्‍ट्र को सर्वोपरी माने, क्‍योंकि देश के बाहर उसकी पहचान एक भारतीय होने के नाते ही है न कि मुसलमान होने के नाते।

तनवीर अहमद ने बातचीत के दौरान सेक्‍यूलरिज्‍म का घिनौना चेहरा भी हमारे समक्ष रखा। उन्‍होंने बताया, जिस दौरान अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मैं हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा था, उस दौरान एक दिन अचानक पूर्व मंत्री आरिफ मोहम्‍मद खां एक प्रतिनिधिमंडल लेकर स्थिति का जायजा लेने पहुंच गए। इस प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा भी मोदी सरकार ने उपलब्‍ध कराया था। उस प्रतिनिधिमंडल में सेक्‍यूलरिज्‍म के झंडबदार व वरिष्‍ठ पत्रकार कुलदीप नैयर और कैबिनेट सचिव जफर सैफुल्‍ला भी शामिल थे। कुलदीप नैयर ने मुझसे पूछा, क्‍या आप आखिरी हज यात्री के सउदी से लौटने का इंतजार करते हुए अंत तक यहां रुकेंगे। मैंने कहा, हां मैं जब तक आखिरी हज यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर लेता, मैं अहमदाबाद एयरपोर्ट से हिलूंगा भी नहीं। इस प्रतिनिधिमंडल ने स्थिति का पूरा जायजा लिया, हज यात्रियों से बात की और संतुष्‍ट होने पर लौटे। लेकिन मुझे आश्‍चर्य तब हुआ जब प्रतिनिधिमंडल में शामिल तीनों सदस्‍यों ने इस पर अपना मुंह सिल लिया। मीडिया या देश के समक्ष उन्‍होंने इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया कि किस तरह से हज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। कुलदीप नैययर खुद को धर्मनिरपेक्ष पत्रकार कहते हैं, लेकिन उन्‍होंने इस पूरे मामले को ही दबा दिया और आज तक उस पर एक शब्‍द भी नहीं लिखा है। उस वक्‍त भी एक मात्र नईदुनिया अखबार ने इसके बारे में लिखा। वर्ना सबने देश की जनता को गुमराह करने का काम किया।

गौरतलब गुजरात दंगे के समय राज्‍य के 6000 यात्री हज यात्रा के लिए गए हुए थे। मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात पुलिस को निर्देश दिया था कि 6000 हाजी हज कर गुजरात लौट रहे हैं। उन्‍हें हर हाल में सुरक्षा प्रदान किया जाए। ये सभी हाजी गुजरात के 400 गांव व कस्‍बों से हज करने गए थे। सरकार ने सभी 6000 हाजियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचा दिया। हालात के नियंत्रित होने के इंतजार और इन्‍हें सुरक्षित घर तक पहुंचाने में सरकार को 30 मार्च 2002 तक का वक्‍त लग गया, लेकिन इनमें से एक को भी हिंसा का सामना नहीं करना पड़ा था।

इतना ही नहीं, पूरे दंगे के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने दंगाईयों के बीच फंसे हुए करीब 24 हजार मुसलमानों को बचाया था, जिसे उस वक्‍त की मीडिया ने दबा दिया था। गुजरात दंगे की जांच सीधे सर्वोच्‍च न्‍यायालय की निगरानी में हुई है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी दंगे की संपूर्ण जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उसके द्वारा गठित विशेष जांच दल ने किया हो। कांग्रेस सरकारों के समय हुए कई दंगों में आज तक न तो एफआईआर दर्ज की गई है और जिसमें एफआईआर दर्ज हुई भी है तो उनमें आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया है। इसलिए गुजरात दंगे की जांच रिपोर्ट पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। यह जांच रिपोर्ट कहती है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने विभिन्‍न जगहों पर दंगाइयों के बीच फंसे हुए करीब 24000 मुसलमानों को न केवल बचाया, बल्कि उन्‍हें सुरक्षित स्‍थानों तक भी पहुंचाया।

मोदी विरोधी हमेशा ये आरोप लगाते रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिंदूओं को दंगा करने की खुली छूट दी और मुसलमानों को करने के लिए छोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की जांच इस असत्‍य को सिरे से खारिज करती है। पेश है कुछ महत्‍वपूर्ण जगहों पर दंगाईयों की भीड़ के बीच से बचाकर निकाले गए मस्लिम समूह के संबंध में जानकारी:-

* अहमदाबाद पुलिस ने नूरानी मस्जिद में फंसे हुए 5000 मुसलमानों को बचाया
* मेहसाना जिला के सरदारपुरा में दंगाईयों से घिर चुके 240 मुसलमानों को न केवल बचाया, बल्कि उन्‍हें वहां से बाहर ले जाकर सुरक्षित स्‍थान पर पहुंचाया भी।
* नरदीपुर व पोरे गांव में 450 मुसलमानों को बचाकर दूसरी जगह पहुंचाया गया
* संजोली गांव में 200 मुस्लिमों को बचाया गया
* वड़ोडरा जिला के फतेहपुर गांव में फंसे 1500 मुसलमानों को बचाया गया
* कावत गांव से 3000 हजार मुसलमानों को बचाकर निकाला गया
* एहसान जाफरी जहां मरे उस गुलबर्ग सोसायटी से उनकी पत्‍नी जाकिया जाफरी समेत करीब 180 मुसलमानों को बचाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया

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