Thursday, May 2, 2013

सरबजीत .... काश तुम अमेरिकन होते

सरबजीत .... काश तुम अमेरिकन होते ...पाकिस्तान आपका एक बाल भी नहीं काट पाता लेकिन तुम बदनसीब हिन्दुस्तानी हो जहाँ सिर्फ चौबीस घंटे शोक मनाया जाएगा ...

फेसबुक पे स्टेटस अपडेट होंगे, मोबतिया जल जायेंगी और फिर कल कोई सूवर की औलाद 'अमन की आशा ' चालू कर देगा , फिर कोई पाकिस्तानी सूवर गायक आ जाएगा .... हम लोग आईपीएल में सूवर देश पाकिस्तानी सूवर क्रिकेटर का समर्थन करने लगेंगे और फिर तुम्हे भूल जायेंगे ...

आज तुम ट्वीटर पर ट्रेंड कर रहे हो ,ब्रेकिंग न्यूज़ हो , यूट्यूब के most watched Video हो :
कल गायले फायले शतक मारेगा और हम तुम्हे भुला देंगे ...

आज सोचता हूँ की साला काश तुम इटालियन होते , कम से कम वोट देने के नाम पर ही भारत आ जाते एक आड़ बार अपने परिवार से तो मिल जाते...

ऊपर जाओगे तो वहां भगत सिंह भी कहेगा "मेरे से ही सीख लेते , किन बेवकूफों के लिए जान दे दी जो क़द्र भी नहीं करते" ...

सरबजीत भाई माफ़ करना लेकिन आप हिंदुस्तान पीड़ित हो !

दिग्विजय के बेटे की व्यथा? पापा तुम कब मरोगे?

दिग्विजय के बेटे की व्यथा?

पापा तुम कब मरोगे?

दुनिया के बाप मर रहे हैं, तुम्ही रह गए बस...
चमचई के सर्वोत्तम शिखर पर पहुँच गए हो भला अब क्या चाहिए
पहले ही इतने कुकर्म कर ही चुके हो की आराम से बीस तिस साल तक गालिया सुनते रहोगे !!
फिर ज़िंदा रह के भी क्या उखाड़ लोगे ..

पापा तुम कब मरोगे?

आप मर जाते तो हमें अनाथ होने की सहानुभूति मिलती,
आपकी तेरहवी पर कपडे सपड़े मिलते...
कही और से ना सही मगर ओसामा अंकल और पकिस्तान भी हमें कुछ जकात फितरा मिल जाता ...
आप कब तक हमें इन सुविधाओं से मरहूम रखोगे ?

पापा तुम कब मरोगे

आप को कसाब भैया की कसम आपको मरना पडेगा !
आप शान्ति से मर जाए वरना शहीदों की विधवाओं से इतनी बददुवा मिल रही की अगले साल आपका कुत्ते की मौत मरना तय है
हे पिताजी इन पवित्र बददुवाओं से कैसे बचोगे ?

पापा तुम कब मरोगे

आपको तो पता ही है की आपको लोग कुत्ता कहने लगे हैं ...
पता नहीं क्यों पर मुझे भी आपके कुत्ता होने का यकीन होने लगा है ....
क्या मै कुत्ते की औलाद हूँ ??....
हे पिताजी आप ही बताएये की क्या मै कुत्ते की औलाद हू ???....
आप हमें "कुत्ते के बच्चे" की गालियों से मुक्त कब करोगे?

पापा तुम कब मरोगे ।।।।

इन्टरनेट पर पिछले तीन साल से एकजुटता

कुछ तथ्य पेश कर हा हु भारतीय युवा वर्ग के
इन्टरनेट पर पिछले तीन साल से एकजुट होने से
क्या-क्या देश में फर्क देखने कोमिला है.
1 देश में कही भी कोई भी घटना हो जल्द ही इन्टरनेट
के जरिये सब को मालूम हो जाती है.
2 सरकार की काली करतूतों का सभी को पता चल
रहा है.
3 देश के खिलाफ साजिश करने वालो को बुरी तरह से
नंगा किया जाता है.
4 कसाब जैसे को फ़ासी युवाओ की एकजुटता से हुई.
5 ओवास्सी जैसे के खिलाफ कारेवाही युवाओ की वजह
से हुई.
6 अफजल को फ़ासी का एक श्रेय युवाओ
को भी जाता है.
7 मोदी जी के खिलाफ गलत धारना रखने
वालो की सोच बदली है.
8 बिकाऊ मीडिया का सच सब के सामने आ रहा है.
9 भारतीय इतिहास का सच सब को पताचल रहा है,
जिसे कांग्रेस्सियो ने अपने अनुसार बदला है.
10 बस भाइयो ऐसे ही लगे रहे और एक बार
मोदी जी को PM बनवा डालो.
फिर यह सब कुछ अपने आप बदल जायेंगा.

संत पंडित लक्ष्मण दास

कुछ मित्र बार बार एक ही रट लगा रहे है की हिन्दू धरम की रक्षा के लिए ही सिक्ख धर्म की स्थापना हुई थी,
उनसे मैं पहले ये पूछना चाहता हु की सिक्खों ने तलवार चलाना, या घुड़सवारी या अन्य हथियारों को चलाना कब सिखा था, और किसने उन्हें ये सब सिखाया था, तो सिखने वाला महान या सिखाने वाला,
क्या ऐसा बोलने वाले किसी भी हिन्दू ने बन्दा बैरागी(संत पंडित लक्ष्मण दास) का नाम सुना है,
नांदेड से चलते हुए इन्होने पंजाब पहुँचने तक मुगलों की लाशो के ढेर लगा दिए थे, सिक्खों को निहंग सिक्ख बनाया, और खालसा सिक्खों को तलवार और अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित किया,
यदि सिक्ख हिन्दुओ की ढाल है, तो 15वी शताब्दी से पहले हिन्दू क्या चूड़ियाँ पहन कर बैठे हुए थे,
गुरु गोबिंद सिंह को क्या आवश्यकता पड़ी थी मराठा शूरवीर शिवाजी महाराज से सहायता मांगने की,
हिन्दू अपने इतिहास को ही गलत पढ़ रहा है, अपने ही शूरवीरो को छुपा कर इतिहास को मलिन कर रहा है,
ये कैसी मानसिकता है, ये कैसी विकृति है,

कुछ सवाल भारत के नोजवानो से



कुछ सवाल भारत के नोजवानो से --->

सरकार और बहुत लोग कहते है की भारत की फोज में 13 लाख जवान है और चीन की में 23 लाख..... तो मेरा सवाल 125 करोड़ के देश में से 75 % नोजवानो से क्या तुम सब हिजड़े हो ?? क्या चार फुटी मोमोज और पास्ता खाने वाली चीनी फोज तुम दूध और दही खाने वालो का मुकाबला कर सकते है ?? क्या सिर्फ एक फोजी की जिम्मेदारी है माँ भारती की रक्षा करना ?? क्या तुमको लोंडियाबाजी देश से प्यारी है ?? चीन के लोग मोमोज और पास्ता खा कर 4 by 4 हो गये है जितने लम्बे उतने ,मोटे.. चीन की 50% लोग मोटापे के शिकार है और भारत के हर नोजवान में देश के प्रति मर मिट जाने का जज्बा,,, चीन ने पैसो से फोज तो बड़ा ली लेकिन क्या वो पैसो से ला पाएंगे भारत के नोजवानो जेसा देश के लिए मरने का जज्बा ??? दुनिया जानती है की जब तक हिन्दुस्तानी चुप रहा है तब तक उसने हर गम सहा है .. लेकिन जब हिंदुस्तानी अपनी माँ भारती के लिए लड़ा है तब तब हजारो पर माँ भारती का एक जवान भरी पड़ा है....कोई भी तब तक नही हारता जब तक वो दिल से हार ना माने ... क्या भारत में सिर्फ 13 लाख ही मर्द है बाकी नामर्द ?? मै नामर्द नही हु अगर देश को मेरी जरूरत पड़ी तो अपने रक्त की आखिरी बूंद तक माँ भारती के लिए बहा दूंगा और आप ??????

अब चीन से युद्ध हुआ तो" इतना भयंकर युध्ह होगा की पूरी दुनिया देखेगी

जनरल वी.के सिंह ने कहा था की अगर अब चीन से युद्ध हुआ तो" इतना भयंकर युध्ह होगा की पूरी दुनिया देखेगी और चाइना बॉर्डर पर १ लाख सेना की तैनाती करवाई और तीन बंद बड़े हवाई पट्टी को दुबा...रा से खुलवाया ,
लेकिन उस समय चीन की हिम्मत नहीं हुई की वो कोई करवाई कर सके ,क्योंकि हमारा सेनापति वी.के सिंह एक शेर की तरह अपनी सेना का सञ्चालन कर रहा था ,और कई मुद्दों पर सरकार से भी नोक झोक हुई ,जिसके कारण सरकार ने एक साल पहले ही उनको रिटाएर कर दिया ,

आज हमे कुशल सेना-पति की जरूरत है ,नहीं तो इतिहास गवाह है की चाइना ने हमे कई बार पटखनी दी है ,लेकिन आज के युग में हमे हौसला देने वाला कोई नहीं है ,ऐसा लगता है की चाइना जब चाहे दिल्ली की गद्दी पर बैठ जायेगा ,आज वक्त जबाब देने का है जैसे हमने कारगिल में दिया था ,

Wednesday, May 1, 2013

चाहे दुनिया कि जिस अदालत में जाना पडेगा.



“ये नाग हैं, पूरे देश को बेच देंगे, किसी को नहीं छोड़ेंगे.... मैं मरने से नहीं डरती... दुनिया की किसी अदालत में जाना पड़े लेकिन छोडूंगी नहीं..... मेरे पति और जवान बेटे को मेरे सामने मारा था इन्होंने...” ७२ वर्षीय जगदीश कौर जब यह बात कह रही थीं तो मुझे लगा कि शायद अब रो देंगी... लेकिन नहीं, १९८४ के दंगों के बाद से इन्साफ के लिए लड़ते लड़ते उनकी आँखों के आंसू शायद अब सूख चुके हैं ... “मेरे तो पिता स्वतंत्रता सेनानी थे, हम तो कांग्रेसी थे, पक्के वाले... जब ये मेरे हसबैंड को मारने लगे तो मैंने कहा था इनको कि इंदिरा गांधी तो हमारी भी नेता थीं, हमें भी बहुत दुःख हो रहा है... लेकिन वो नहीं माने.. मेरे पति को वहीं मार दिया, बड़ा बेटा भागा तो उसको भी मेरे सामने ही आग लगा दी.... मुझे उसे बचाने भी नहीं दिया... मेरी आँखों के सामने..,”
“ छोटे बच्चों को पड़ोस के पंडित जी के घर छिपाकर मैं पुलिस के पास भागी... वहां दरोगा बोला – अभी तो और मरेंगे.. मैं वापस आई तो ये लोग पंडित को भी मारने पहुँच गए, क्योंकि उसने हमें शरण दी थी..... हम वहां से भाकर वापस अपने घर आ गए.... बच्चों को मैंने छत पर छिपा दिया.. पूरी रात मैं कभी बेटे की बाड़ी के पास बैठती तो कभी हसबैंड की बाड़ी के पास बैठ जाती... अगले दिन मैं फिर पुलिस चौकी गई.. वहां पर तो प्लानिंग बन रही थी... दरोगा, दंगाइयों को कह रहा था कि तुम पहले पहुँचो, हंगामा करो, मैं पीछे से आता हूँ... मैं वहां से भागी... एक पुलिस की गाडी खड़ी थी.. मैं वहां पहुंची...मैंने कहा अब तो बचा लो, अब तो बहुत मर गए... तभी भीड़ वहां आ गई... पीछे से सज्जन कुमार आया, उसने पुलिस की जीप में लगा माइक लेकर आवाज़ लगानी चालू कर दी.. एक भी सिख नहीं बचना चाहिए...फिर वो पुलिस के साथ ही बैठकर चला गया... मैं दौड़कर वापस घर पहुंची...
... घर में दो बच्चे छिपे थे, दो लाशें पड़ी थीं... मैं रोती रही...घर के बाहर मेरे भाई को, उनके बेटों को भी जला दिया था...वहां पहुंची तो पुलिस वाला, उनसे (दंगाइयों से) पूछ रहा था.. कितने मुर्ग भूने आज? .. दो दिन तक .....यहाँ से वहां, भागती रही.. लेकिन कोई ये कहने वाला नहीं मिला कि तेरे बच्चों को हम बचा लेंगे... रात भर गोलियां चलती थीं.... तीसरे दिन पडोसी त्यागी जी आये, डरते डरते ... उनके साथ मिलकर मैंन घर के सोफे को तोड़ा, ... जो थोड़ा बहुत और फर्नीचर था उसको तोड़ा और अपने पति और बेटे के लिए चिता बनाई... दो दिन से पड़ी लाशों का अंतिम संस्कार मैंने अपने घर में ही कर दिया...”
“.............................................. मैं कह रही हूँ कि मैंने देखा और कोर्ट कह रहा है कि सबूत नहीं है...छोडूंगी नहीं मैं इन्हें, चाहे दुनिया कि जिस अदालत में जाना पडेगा...”
मैं और अरविंद, स्तब्ध , सुन रहे थे.... अंत में बस इतना ही कह सके...” आपका जीतना ज़रूरी है, इंसानियत के लिए.. “... इनके हौसले के सामने हर थकावट, हर पराजय छोटी है.. सलाम...

Paid मीडिया का रोल

क्या मोदी सरकार पिछली यूपीए सरकार की तुलना में मीडिया को अपने वश में ज्यादा कर रही हैं? . यह गलत धारणा पेड मीडिया द्वारा ही फैलाई गयी है ...