Sunday, February 23, 2014

संजय सिंह के बयान से तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं

इन महानुभाव के बयान से तीन बातें ध्यान देने योग्य हैं--


"आप पार्टी" (आपकी आतंकवादी पार्टी) के नेता "संजय सिंह" ने कहा है कि जो अवैद्य बांग्लादेशी पाँच साल या उससे ज्यादा समय से भारत में रह रहे हैं उन्हे भारत की नागरिकता दे दी जाये।

वे तीन बाते हैं--

1. पहली तो ये कि अवैद्य बांग्लादेशी तो वोटर नहीं है फिर यह "लॉलीपोप" किसके लिए फेंकी गई है?
दरअसल यह लॉलोपोप मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए फेंकी गई है। भारत का मुसलमान देश को धर्मशाल समझता है। वह बाँग्लादेश से भागकर आने वाले बाँग्ला-मुसलमानों को यहाँ आसाम, पश्चिम बंगाल, बिहार में बसाना चाहता है (चाहे वे भारत में जाली नोटों, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी घटना को अंजाम शौक से दे) इसलिए खुश होकर भारत का मुसलमान AAP को वोट करेगा, चाहे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा चाहे चूल्हे-भाड़ में।

2. दूसरी, बाँग्लादेश बाँग्ला मुसलमानों की उच्च जन्म दर, भयंकर निर्धनता और मजहबी कट्टरता से जूझ रहा है। ऐसे में वहाँ से भागकर आ रहे बाँग्ला मुसलमानों को भारत में बसाना भारत के रोजगार क्षेत्र, जंगल-जमीन, अर्थव्यवस्था, साम्प्रदायिकता और सुरक्षा के लिए खतरा है।

3. तीसरी, बाँग्ला मुसलमान न धार्मिक अत्याचार से पीड़ित हैं न साम्प्रदायिक हिंसा से, तो फिर वे किस आधार पर भारत में बसाये जा रहे हैं? जबकि इसके विपरीत (जैसा कि सभी जानते हैं) पाकिस्तान और बांग्ला हिन्दुओं पर धार्मिक अत्याचार हो रहे हैं, उनके साथ अमानवीय व्यवहार हो रहे हैं, उनका जबरन धर्म बदला जा रहा है, इसलिए वहाँ से पलायित हिन्दू सेक्युलरों को भारत में खतरा दिखाई पड़ते हैं। वहाँ से भागकर आ रहे हिन्दुओं को भारत में नागरिकता दिये जाने का कांग्रेस विरोध करती है और आप पार्टी इस सम्बन्ध में मौन है।

क्यूँ सभी सेक्युलर पार्टियाँ मुस्लिम वोट के लालच में अवैद्य बाँग्ला-मुसलमानों की नागरिकता की वकालात करती हैं, लेकिन पीड़ित हिन्दुओं को कहा जाता है कि वे अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों का सबूत दें?

जो हिन्दू भारत में शरणार्थी बन कर आते हैं और वैद्य रूप से गृह मन्त्रालय में नागरिकता की याचना और आवेदन करते हैं उनकी नागरिकता सम्बन्धी याचनाएँ टेबलों पर पड़ी धूल खा रही हैं लेकिन जो जेहादी मानसिकता के साथ अवैद्य रूप से आकर भारत में बस रहे और भारत के लिए हर प्रकार से खतरा बन रहे हैं, उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलन्द की जा रही हैं।
इस देश में तिब्बतियों, वर्माइयों, पारसियों, नेपाली, भूटानी, अफगानियों, बाँग्लादेशियों के लिए तो जगह हैं, क्या पाकिस्तान-बाँग्लादेश के हमारे हिन्दू भाई-बहनों के लिए थोड़ी सी भी जगह नहीं है?

यह तो भारत के हिन्दुओं को सोचना होगा कि इस देश की राजनीति के पहियों में "धुरी" कौन है- "बहुसंख्यक हिन्दू" या मुठ्ठी भर मलेच्छों की जमात ??

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