Tuesday, August 6, 2013

मंदिर को भी ध्वस्त किया था परन्तु तब तो सांप्रदायिक माहोल

दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ जिस प्रकार का व्यवहार मुलायम कर रहा है उससे ऐसा लगता है की उत्तर प्रदेश उनके परिवार की जागीर है। जिसे चाहे जैसा चाहे वैसा कर दे !! उत्तर प्रदेश में नागपाल ने तीन मंदिर को भी ध्वस्त किया था परन्तु तब तो सांप्रदायिक माहोल नहीं ख़राब हुआ था एक अवैधानिक तौर पर बनायेजा रहे मस्जिद की दीवाल टूटने से कैसे माहोल ख़राब हो जाएगा ? तुर्की , इंडोनेशिया जैसे इस्लामिक देशो में भी मस्जिद बनाने के लिएअनुमति लेनी परती है. जर्मनी, फ्रांस , ब्रिटेन की बात तो मत ही किजिये. 

चलिए इस प्रसंग ने एक और ऐतिहासिक प्रसंग की यद् दिल दी है. १९४७-४८ की बात है. अजमेर में दंगा हुअ. ८०० लोग जो दंगा से प्रत्यक्ष तौर पर जुरे थे गिरफ्तर हुए. दुर्भाग्य से अधिकाश एक ही समुदाय के लोग थे. इस पर मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल सीधे पंडित नेहरु से मिलने दिल्ली आया और नेहरु ने अपने एक अधिकारी आयंगर को अजमेर भेज दिया. उस समय अजमेर के मुख्य सचिव शंकरी प्रसाद थे। वे घोर इमानदार और संविधान, कानून , न्याय में आस्था रखने वाले पदाधिकारियों में गिने जाते थे। उनपर नेहरु का दबाव था की सामाजिक संतुलन बनाये रखने के लिए दूसर समुदाय के भी उतने ही लगो को गिरफ्तार कर लिया जाना चहिये. शंकरी प्रसाद इस तर्क से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि जिन्होंने काननों को तोर और जो उनके victims हैं दोनों को एक तराजू पर कैसे रखा जा सकता है. फिर शंकरी प्रसाद नेहरु द्वारा केंद्र से अधिकारी भेजने को अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन मानकर अपने इस्तीफे की पेशकश की जो नेहरु चाहते थे. तब सरदार पटेल ने नेहरु को कड़ा पत्र लिखकर शंकरी प्रसाद के प्रति पूर्ण आस्था और समर्थन दिखया. उन्होंने लिखा की इमानदार और प्रतिबद्ध नौकरशाहों को हतोत्साहित, अपमानित और कर्तव्यहीनता का पढ़ पढ़कर हम राष्ट्र निर्माण नहीं कर सकते है. नेहरु और पटेल दोनों इस विषय पर आमने सामने थे. और दोनों के बीच बात इतनी बढ़ गयी की दोनो ने महात्मा गाँधी को अपना अपना इस्तीफा भेज दिया। गान्ही जी की हत्या हो जाने के कारण विषय दबकर रह गया. दुर्गा शक्ति तो है, नेहरु के वारिस भी हैं पर पटेल के वारिस की अकाल से राजनीति त्रस्त है. दुर्गा को इस भ्रस्त्र राजनीतिज्ञों को सबक सिखाने के लिए संभवतः व्यापक भूमिका में जाना होगा. शायद नियति की यही मांग है.

No comments:

Post a Comment

अधार्मिक विकास से शहर बन रहे है नरक

जीता-जागता नरक बनता जा रहा है गुरुग्राम: स्टडी गुरुग्राम गुरुग्राम में तेजी से हो रहे शहरीकरण और संसाधनों के दोहन को लेकर एक स्टडी ...