Friday, March 29, 2013

पचास साल बाद जन्लोक्पाल


आज से पचास साल बाद यदि जन्लोक्पाल आ गया तो एक आईएएस अधिकारी के घर पर ऐसी चर्चा होगी


पोता ,,,,बाबा जी क्या करूँ कोई रोजगार नहीं है क्या ठेला लगाऊं

बाबा ,,,,हाँ बेटा कोई काम बुरा नहीं होता ,,,,,,सब तो इंसान ही करते हैं

पोता,,,,बाबा क्या आपके जवाने में भी ऐसा ही था ऐसी ही बेरोजगारी थी

बाबा ,,,,नहीं बेटा उस समय भी मई कुछ तो इमानदारी से काम करता था नेता लोगो का उतना दबाव नहीं था ,,,,था ,,पर कम था

पोता,,,तो अब क्या ऐसा हो गया

बाबा ,,,अब बेटा ये लोकपाल इमानदार लोगो पर ताना शाही चलाता है ,,,कहता है की केवल विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले काम करो ,,जो लोग करते हैं उसका काम उनको छोड़ देता है जो लोग नहीं करते उनको झूठे केस में फसवा कर जेल भेज देता है

पोता,,कौन लाया था ये कानून ,,,,

बाबा ,,,बेटा बहुत बड़ा आन्दोलन हुआ था अन्ना और अरविन्द केजरीवाल के समर्थन में ,,,,,लेकिन वो लोग UNCAc का काम कर रहे थे

पोता,,,,,आप लोगो ने क्या जन्लोक्पाल का ड्राफ्ट नहीं पढ़ा था ,,,,क्यों समर्थन कर दिया

बाबा ....बेटा हम लोग भी कमाने खाने में व्यस्त थे इतना टाइम नहीं था मै भी गया था आन्दोलन में

पोता ,,, इसका मतलब आपने बगैर पढ़े आन्दोलन का समर्थन कर दिया

बाबा ,,, हाँ बेटा यही गलती हो गई थी मुझसे

पोता ,,,क्या पुरे देश में किसी ने बारीकी से नहीं सोचा था

बाबा ,,,, नहीं ऐसी बात नहीं है कुछ लोग आम जनता से थे वो समझाते थे ,,पर लोग नारे बाजी करके उनको दबा देते थे

पोता ,,,,क्या उस समय के पार्टी नेताओं ने विरोध नहीं किया था

बाबा ,,,हाँ किया था ,,लेकिन बिकाऊ मिडिया जो की खुद विदेशी है इतना मामला उलझा दिया की किसी को पता ही नहीं चला की जो पार्टी कांग्रेस विरोध कर रही थी वही लोकपाल पास करके जाएगी

पोता ,,,पर जनता ने इतना समर्थन क्यों किया था

बाबा ,,,बेटा जनता उस समय के भ्रष्टाचार से इतना परेशान हो गई थी की भेड़ की तरह समर्थन कर दिया पढ़ा नहीं की जन्लोक्पाल में क्या है

पोता,,पर आपने भी तो नहीं पढ़ा था इतने पढ़े लिखे होकर

बाबा ,,, हाँ बेटा मुझसे भी गलती हो गई थी
आज से पचास साल बाद यदि जन्लोक्पाल आ गया तो एक आईएएस अधिकारी के घर पर ऐसी चर्चा होगी


पोता ,,,,बाबा जी क्या करूँ कोई रोजगार नहीं है क्या ठेला लगाऊं

बाबा ,,,,हाँ बेटा कोई काम बुरा नहीं होता ,,,,,,सब तो इंसान ही करते हैं

पोता,,,,बाबा क्या आपके जवाने में भी ऐसा ही था ऐसी ही बेरोजगारी थी

बाबा ,,,,नहीं बेटा उस समय भी मई कुछ तो इमानदारी से काम करता था नेता लोगो का उतना दबाव नहीं था ,,,,था ,,पर कम था

पोता,,,तो अब क्या ऐसा हो गया

बाबा ,,,अब बेटा ये लोकपाल इमानदार लोगो पर ताना शाही चलाता है ,,,कहता है की केवल विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाले काम करो ,,जो लोग करते हैं उसका काम उनको छोड़ देता है जो लोग नहीं करते उनको झूठे केस में फसवा कर जेल भेज देता है

पोता,,कौन लाया था ये कानून ,,,,

बाबा ,,,बेटा बहुत बड़ा आन्दोलन हुआ था अन्ना और अरविन्द केजरीवाल के समर्थन में ,,,,,लेकिन वो लोग UNCAc का काम कर रहे थे

पोता,,,,,आप लोगो ने क्या जन्लोक्पाल का ड्राफ्ट नहीं पढ़ा था ,,,,क्यों समर्थन कर दिया

बाबा ....बेटा हम लोग भी कमाने खाने में व्यस्त थे इतना टाइम नहीं था मै भी गया था आन्दोलन में

पोता ,,, इसका मतलब आपने बगैर पढ़े आन्दोलन का समर्थन कर दिया

बाबा ,,, हाँ बेटा यही गलती हो गई थी मुझसे

पोता ,,,क्या पुरे देश में किसी ने बारीकी से नहीं सोचा था

बाबा ,,,, नहीं ऐसी बात नहीं है कुछ लोग आम जनता से थे वो समझाते थे ,,पर लोग नारे बाजी करके उनको दबा देते थे

पोता ,,,,क्या उस समय के पार्टी नेताओं ने विरोध नहीं किया था

बाबा ,,,हाँ किया था ,,लेकिन बिकाऊ मिडिया जो की खुद विदेशी है इतना मामला उलझा दिया की किसी को पता ही नहीं चला की जो पार्टी कांग्रेस विरोध कर रही थी वही लोकपाल पास करके जाएगी

पोता ,,,पर जनता ने इतना समर्थन क्यों किया था

बाबा ,,,बेटा जनता उस समय के भ्रष्टाचार से इतना परेशान हो गई थी की भेड़ की तरह समर्थन कर दिया पढ़ा नहीं की जन्लोक्पाल में क्या है

पोता,,पर आपने भी तो नहीं पढ़ा था इतने पढ़े लिखे होकर

बाबा ,,, हाँ बेटा मुझसे भी गलती हो गई थी

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