Saturday, April 27, 2013

सेल्यूकस की बेटी थी हेलेन

सेल्यूकस की बेटी थी हेलेन , उसका विवाह आचार्य चाणक्य ने प्रस्ताव मिलने पर सम्राट चन्द्रगुप्त से कराया.पर उन्होंने विवाह से पहले हेलेन और चन्द्रगुप्त से कुछ शर्ते रखी जिस पर उन दोनों का विवाह हुआ.
पहली शर्त यह थी की उन दोनों से उत्पन्न संतान उनके राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगा और कारण बताया की हेलेन एक विदेशी महिला है , भारत के पूर्वजो से उसका कोई नाता नहीं है. भारतीय संस्कृति से हेलेन पूर्णतः अनभिग्य है और दूसरा कारण बताया की हेलेन विदेशी शत्रुओ की बेटी है.उसकी निष्ठा कभी भारत के साथ नहीं हो सकती. तीसरा कारण बताया की हेलेन का बेटा विदेशी माँ का पुत्र होने के नाते उसके प्रभाव से कभी मुक्त नहीं हो पायेगा और भारतीय माटी, भारतीय लोगो के प्रति पूर्ण निष्ठावान नहीं हो पायेगा.

एक और शर्त चाणक्य ने हेलेन के सामने रखी की वह कभी भी चन्द्रगुप्त के राज्य कार्य में हस्तक्चेप नहीं करेगी और राजनीति और प्रशासनिक अधिकार से पूर्णतया विरत रहेगी. परन्तु गृहस्थ जीवन में हेलेन का पूर्ण अधिकार होगा.

इंदिरा गांधी एक कठोर और बुद्धिमान शासक थी वो अपने पुत्रो की राजनीतिक गुरु भी थी.उनके एक पुत्र राजिव गांधी ने एक निकृष्ट विदेशी महिला जो की भोजनालयो में भोजन परोसने का कार्य कराती थी से शादी करने का प्रस्ताव रक्खा. उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया और सोनिया तथाकथित नाम के महिला से राजीव का विवाह हुआ. शायद इंदिरा गांधी ने आचार्य चाणक्य से ज़रा भी सीख नहीं ली अंततः अन्यान्य कारणों से राजिव गांधी की मृत्यु हो गयी , कुछ विद्वान् इस ह्त्या में इस विदेशी महिला का भी हाथ मानते है, बाद में यह महिला पूरा राज्यकार्य और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त कर लिया और धीरे धीरे देश की सारी राजसत्ता इसकी गुलाम हो गयी है. अब इसका पुत्र जो की अपने पिता की जल्दी मृत्यु के कारण पूर्णतया माँ से ही सारे आचार विचार, व्यवहार ,धर्म संस्कृति, शिष्टाचार प्राप्त किया है राजसत्ता हासिल करने के फिराक में है. और ऐसे अनिष्ठावान , बुद्धिहीन, विदेशी संस्कृति सभ्यता में पले बढे, भारतीय माटी और भारतीय लोगो से दूर ऐसे व्यक्ति को राजसत्ता हासिल करना भारतवर्ष के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा.

यही मूल अंतर तबके स्वाभिमान संपन्न, वीरतापूर्ण , अखंड, ओजस्वी भारतवर्ष और आज के समय के कायर ,दब्बू और स्वभिमानशून्य भारत में है.

सोचे समझे और जागे. राष्ट्र आपका है विदेशियों का नहीं.. संस्कृतियुक्त ,सभी , निष्ठावान लोगो को ही आगे बढाए तभी राष्ट्र तेजस्वी ओजस्वी अखंड और महान बन सकेगा.

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