Wednesday, April 3, 2013

अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा कन्फ्यूज्ड

अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा कन्फ्यूज्ड मैंने आज तक किसी को नहीं देखा!

वैसे इनके खानदान को देख कर ही लगता है की यह सारा खानदान ही कन्फ्यूज्ड है! आम आदमी की बात करते हैं केजरीवाल पर शायद पूरी ज़िन्दगी इन्होने आम आदमी की तकलीफ नहीं उठाई होगी! इनके बाबा एक बड़े बिजनेसमैन थे, पिता बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग से उच्च शिक्षा प्राप्त इंजिनियर! यह महाशय जो आम आदमी की बात कर रहे हैं यह मुह में चांदी का चम्मच ले कर पैदा हुए थे! जब घर का माहौल ही ऐसा होगा तब हर तरह के 'कम्फर्ट जोन' में रहते हुए इन्होने IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री ली तो कौन सी बड़ी बात थी!

पर शायद अरविन्द केजरीवाल कभी इस बात का निर्णय नहीं कर पाए की उन्हें जाना कहाँ था और यह पंहुचे कहाँ? यह कभी एक जगह एक निर्णय पर कभी नहीं टिके! बड़े आदमी थे ज़रुरत भी क्या की आम आदमी की तरह हालात से समझौता करते?

इंजीनियरिंग की डिग्री ले कर टाटा स्टील ज्वाइन की और फिर वह छोड़ दी! आखिर बड़े आदमी ठहरे! उसके बाद यह कलकत्ता मदर टेरेसा के मिशनरी ऑफ़ चैरिटी चले गए | वहां ही इनके अंदर हिन्दू विरोध की भावना जागी | ईसाई पादरियों ने इनके मन में हिदुत्व के प्रति घोर नफरत भर दिया | फिर सोचा की चलो IAS की परीक्षा दी जाये! थोड़ी कम रैंक आई तो IRS ज्वाइन कर ली! थोड़े दिन जॉब करने के बाद इन्होने समाज सेवा शुरू कर दी! फिर अन्ना के साथ जुड़े! कहा की राजनीती से दूर रहेंगे! फिर खुद ही राजनीती में कूद गए! अब देखिये यहाँ कब तक टिकते हैं?

वैसे इनके लिए यह गाना पूरी तरह से उपयुक्त हैं "" निकले थे कहाँ जाने के लिए पहुचे हैं कहाँ मालूम नहीं ....खुद अपने भटकते कदमो को अपना निशाँ मालूम नहीं!"""

भाई बार बार प्रोफेशन बदलने का काम तो आम आदमी कर ही नहीं सकता यह काम तो सिर्फ और सिर्फ केजरीवाल जैसे वड्डे वड्डे आदमी ही कर सकते हैं!

मित्रो, 0-200 के स्लैब में दिल्ली में बिजली यूपी से महंगी है ... लेकिन इस स्लैब में सिर्फ २% लोग ही आते है | सबसे ज्यादा लोग 200-400 यूनिट के स्लैब में आते है .. और इस स्लैब में यूपी में बिजली दिल्ली की अपेक्षा 40% महंगी है |

यूपी में एवरेज बिजली ८ घंटे आती है और दिल्ली में २२ घंटे |
मीटर का मासिक किराया, फिक्स्ड चार्ज, आदि को बिजली आने या जाने से कोई मतलब नही ..यानी अगर बिजली एक साल भी न आये तो भी आपको ये सब देना ही होगा |

केजरीवाल यूपी के वोटर है .. गाजियाबाद में उनका स्थाई पता है | संजय सिंह, मनीष सिसौसिया, कुमार विश्वास, गोपाल राय, शांति भूषण, प्रशांत भूषण यानी पूरी की पूरी दलालों की गैंग यूपी की ही रहने वाली है |

फिर मै इन तथाकथित फेसबुक क्रांतिकारीयो और इमानदारो से ईमानदारी पूर्वक पूछना चाहता हूँ कि क्या यूपी के लोग इन्सान नही है ?

मित्रो, असल में ये पूरी "गैंग ऑफ़ एनजीओ" असल में कांग्रेस के द्वारा कांग्रेस के विरोध करने के लिए ही बनाई गयी है | ये लोग अभी दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी से सुपारी लेकर दिल्ली में अनशन कर रहे है .. मतलब जो खेल अंग्रेजो ने खेला वही खेल कांग्रेस के ईशारे पर ये सुपारीबाज गैग कर रही है

इनके अनुयायियों को शायद भटकने का शौक है इस लिए वह इनके साथ भटक रहे हैं! वह आदमी जो खुद नहीं जानता की वह आखिर चाहता क्या है वह एक सशक्त नेतृत्व कर समाज को दिशा क्या देगा? वह तो बस टाइम पास करेगा और फिर जब शौक पूरा हो गया तो किसी और दिशा में चला जायेगा और अपने अनुयायियों को अधर में लटकता छोड़ देगा! भाई बड़े आदमी ठहरे केजरीवाल सब कुछ कर अफोर्ड कर सकते हैं!


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