Friday, March 29, 2013

ईसाईयों की पोल पट्टी

सुना है कुछ लडकियां दिल्ली मेट्रो स्टेशनो के बाहर बाइबिल बाँट रही है,

कुछ मित्र नफरत करके नहीं ले रहे है,

मेरे प्यारे मित्रो, अवश्य लो और बल्की अपने साथ जितने लोग हो सबको दिलवाओ....
उस किताब के साथ आप क्या करेंगे वो आपका निजी फेसला होगा उसमे कोई आपको रोक नहीं पायेगा पर आपके पास जाने से एक इसाई बनने से रुकेगा........

वो छपवाते रहे आप लेते रहो का अनुसरण करे.........

ईसाइयत पर भारत के महापुरुषों द्वारा दिए गए क्रातिकारी विचार

आप मिशनरियों को शिक्षा कपड़े और पैसे क्या इसलिए देते हैं कि वे मेरे देश (भारत) में आकर मेरे मेरे सभी पूर्वजों को, मेरे धर्म को और जो भी मेरा है , उस सब को गालियां दें, भला बुरा कहें । वे मंदिर के सामने खड़े होकर कहते हैं ऐ ! मूर्तिपूजकों तुम नरक में जाओगे, लेकिन हिन्दुस्तान केमुसलमानों से ऐसी ही बात करने की उनकी हिम्मत इसलिए नहीं होती कि कहीं तलवारें न खिंच जाएं ............................. और आपके धर्माधिकारी जब भी हमारी आलोचना करें, तब वे यह भी ध्यान रखें कि यदि सारा हिन्दुस्तान खड़ा होकर सम्पूर्ण हिन्द महासागर की तलहटी में पड़े कीचड़ को पश्चिमी देशों पर फेंके, तो भी अन्याय के अंश मात्र का ही परिमार्जन होगा जो आप लोग हमारे साथ कर रहे हैं ।
डेट्राइट में ईसाइयों की एक सभा में बोलते हुए स्वामी विवेकानन्द ने कहा

बाबा साहब भीम राव अंबेडकर :- यह एक भयानक सत्य है कि इसाई बनने से अराष्ट्रीय होते हैं ।साथ ही यह भी सत्य है कि इयाईयत, मतान्तरण के बाद भी जातिवाद नहीं मिटा सकती । (राइटिंग एण्ड स्पीचेज वाल्यूम 5 पृष्ठ 456)

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन :- तुम्हारा क्राइस्ट तुम्हें एक उत्तम स्त्री और पुरुष बनाने में सफल न हो सका, तो हम कैसे मान लें कि वह हमारे लिए अधिक प्रयास करेगा, यदि हम इसाई बन भी जाएं ।

गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर :- ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है (रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृष्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर)

मोहनदास करम चन्द्र गांधी :- यदि वे पूरी तरह से मानवीय कार्यों तथा गरीबों की सेवा करने के बजाय डाक्टरी सहायता, शिक्षा आदि के द्वारा धर्म परिवर्तन करेगें, तो मैं निश्चय ही उन्हें चले जाने को कहूंगा । प्रत्येक राष्ट्र का धर्म अन्य किसी राष्ट्र के धर्म के समान ही श्रेष्ठ है । निश्चय ही भारत का धर्म यहां के लोगों के लिए पर्याप्त है । हमें धर्म परिवर्तन की आवश्कता नहीं । (गांधी वाङ्मय खण्ड ४५ पृष्ठ ३३९)

जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती कांची कामकोटि पीठ :- एशिया में ईसाइयत के लिए कोई जगह नहीं है । हिन्दू धर्म को जो खतरा उत्पन्न करेगा, वह खुद खत्म हो जाएगा ।




ईसाईयों की थोड़ी सी और पोल पट्टी खोल दी जाए
बाइबिल व्यवस्था विवरण अध्याय 12

01. जो देश तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें अधिकार में लेने को दिया है, उस में जब तक तुम भूमि पर जीवित रहो तब तक इन विधियों और नियमों के मानने में चौकसी करना।
02. जिन जातियों के तुम अधिकारी होगे उनके लोग ऊंचे ऊंचे पहाड़ों वा टीलों पर, वा किसी भांति के हरे वृक्ष के तले, जितने स्थानों में अपने देवताओं की उपासना करते हैं, उन सभों को तुम पूरी रीति से नष्ट कर डालना;
03. उनकी वेदियों को ढा देना, उनकी लाठों को तोड़ डालना, उनकी अशेरा नाम मूत्तिर्यों को आग में जला देना, और उनके देवताओं की खुदी हुई मूत्तिर्यों को काटकर गिरा देना, कि उस देश में से उनके नाम तक मिट जाएं।




त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर मिजोरम में अब तक 10000 से अधिक सैनिको, 20000 से अधिक हिन्दुओ और हिन्दू औरतो को डायन बता कर जिन्दा जला दिया गया, क्या आज तक इन ईसाई आतंकवादियों पर किसी की नजर गयी,
क्या आज तक इन आतंकवादियों के खिलाफ किसी ने आवाज उठाई,
देश में बवाल मच जाता है जब कश्मीर में कोई जवान इस्लामिक जिहादियो के सामने बलिदान देता है,
पर वहां मर रहे हमारे जवानों की तरफ किसी मीडिया का ध्यान नहीं जाता, क्यों???
इस खबर को अधिक से अधिक फैलाए और लोगो को ईसाई आतंकवाद के बारे में भी सचेत करे
ये इसाई मुसलमानों से भी अधिक खतरनाक है

आज बताऊंगा आप सब को पोप का रोचक इतेहास:
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खुद को विश्व का सबसे बड़ा धर्म कहने वाली ईसाइयत और इनके पोप के बारे में जान कर आपको हसी भी आयेगी और अजरज भी होगा:
अब तक कुल 773 पोप हुए है, सन 850 में पोप रहे जान अष्टम बाद में महिला निकले एक कथा का मानना है के जान अष्टम के महिला होने का तब पता चला जब उसने रोम में एक जुलूस के दोरान एक बच्चे को जनम दे दिया।।।
हेरानी वाली बात ये है के एक बार पोप बना दिए जाने के बाद उसको हटाया नहीं जा सकते उसकी हत्या कर सकते है कमसे कम 6 पोप ऐसे है जिनकी हत्या की गयी।।
ज्यादातर पोप इटली के थे जिनकी सख्या 205 है यानि कुल पोप का 77 फ़ीसदी। कुल पोप में से 23 ने जोन नाम चुना, 16 ने ग्रेगरी,15 ने बेनेडिक्ट।।
जान कर हेरानी होगी 7 पोप शादीशुदा थे जिनमे पोप सैंट पीटर भी एक थे, छे पोप नाजायज ओलादो के बाप थे,अवेध संतान रहे पोप ग्रेगरी तृतीये थे जो 1570 में पोप बने,विवाह करने वाले आखिरी पोप 1440 में पोप फेलिक्स थे।।
बेनेडिक्ट नवम सबसे रंगीन मिजाज पोप थे, हल के इतेहस्कार उन्हें सबसे ख़राब पोप मानते है

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