Tuesday, July 16, 2013

गाँधी 1942 में आटोग्राफ देने के 5 रूपये चार्ज लेता था

क्या आप जानते है की इन दोगले कांग्रेसियो के पितामह गाँधी जी 1942 में आटोग्राफ देने के 5 रूपये चार्ज लेते थे .. 

इसके पीछे गाँधीजी तर्क देते थे की जिस वस्तु को इन्सान पैसे खर्च करके हासिल करता है वो उसकी इज्जत करता है और वो पैसा गाँधी जी आश्रम के गौशाला पर खर्च करते थे |

लेकिन मोदी को सामने देखकर कांग्रेसियो की वही हालत हो गयी है जो किसी कुत्ते की हालत शेर के सामने पड़ने पर होती है ..इसलिए इन नीच कांग्रेसियो को अपना ही इतिहास नही याद है ... अगर मोदी जी के सभा से कुछ पैसे इक्कठा करके उत्तराखंड के पीडितो को दिया जाए तो इसमें क्या बुरा है ?


http://www.dadinani.com/capture-memories/read-contributions/major-events-pre-1950/39-mahatma-gandhis-last-autograph-by-r-c-mody


In January 1948, I was living in Alwar, now a part of Rajasthan, which at that time was a quasi-independent Princely State – the Maharaja had signed the Instrument of Accession, but not the Instrument of Merger. Alwar had more than its normal share of the post-Partition riots and unrest, which, for months, had disrupted rail travel to and from Delhi, a distance of about one hundred miles. I needed to go to Delhi urgently, but had to wait until I could get a seat in a Government vehicle going there – the only safe way to travel. I managed to get to Delhi on January 28th.
In Delhi, I attended Mahatma Gandhi’s prayer meeting at the Birla House on the evening of January 29th. I left there my autograph book there for the Mahatma's signature, for which I had to pay his prescribed fee was Rs. 5 for his Harijan Fund. 

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