Wednesday, March 26, 2014

सेकुलरिज़्म का नायाब नमूना पेश है

सेकुलरिज़्म का एक और नायाब नमूना पेश है - बंगलौर के एक चर्च में नियुक्तियों और धन-संपत्ति के मुद्दे को लेकर पादरी इल्यास, विलियम पेट्रिक और पीटर (तीनों नाम सेकुलर हैं) ने मिलकर एक और सेकुलर केजे थॉमस की हत्या की... आसाराम और "चर्बीगोला" की हर-हर मोदी वाली सलाह पर अपने कपड़े फाड़ने वाले बुद्धिजीवियों को कभी आपने चैनलों पर चर्च में जारी "बदफैली" पर चर्चा करते सुना है??? नहीं सुना होगा...

इसी को सेकुलरिज़्म कहते हैं...| स्वाभाविक है "बुद्धिजीवी" शब्द से घृणा गहरी होती जाती है, दल्लात्मक मीडिया के प्रति गुस्सा और बढ़ता ही जाता है...

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