Wednesday, March 26, 2014

भारत में ''धर्म-निरपेक्षता'' की परिभाषा

ये है हमारे देश की तथाकथित ''धर्म-निरपेक्षता''
अगर मंदिर गई थी तो स्वीकारने में क्या हर्ज था..??????

शाजिया इल्मी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान वोटों के लालच में गाजियाबाद के दूबेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा अर्चना क्या कर ली उसके धरम के तथाकथित धरम निरपेक्ष लोग उसके खिलाफ खड़े हो गए. यहाँ तक कि उसके खिलाफ इस्लाम से निष्काशन का फतवा भी जारी कर दिया गया.

जब शाजिया के कुछ धर्म भाइयों ने उस से कहा कि वो मंदिर में पूजा करने क्यूं गई तो खुद मीडिया से आई इन मोहतरमा ने कहा कि वो किसी मंदिर में नहीं गई और मीडिया हमेशा झूठी खबर दिखाता है. यह मीडिया का दुष्प्रचार है। उन्होंने कहा कि लोगों को मीडिया की खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा और सपा ने देश को बांटा है। हिंदू-मुसलमान एकजुट होकर अपनी बेटी व बहन शाजिया को जिताएं, तभी देश से भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है। क्या शाजिया को मंदिर जाने पे ऐतराज है ...?

शर्म आती है शाजिया और इनके धर्म के ठेकेदारों की इस तथाकथित ''धर्म-निरपेक्ष'' सोच पर.जहां हमारे दुसरे धर्मों के बंधू मरे हुए लोगों की मजारों और मस्जिदों में नाक रगड़ते घुमते हैं और उन्हें कोई धर्म से नहीं निकालता वहीँ दूसरी और एक मुस्लिम के मंदिर जाने पे इतना बड़ा बवाल और धर्म से निष्काशन तक झेलना पड़ता है और वो खुद ही मंदिर जाने को गलत मानती है

ये है हमारे भारत में ''धर्म-निरपेक्षता'' की परिभाषा .........!!!!!


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