Thursday, March 13, 2014

"आप" से अब क्या कहूँ मे


"आप" से अब क्या कहूँ मे,
"आप" क्या दे दीजिये,
मुझको मेरी बेगुनाही की सजा दे दीजिये |
"आप" ही ने जग को भ्रमित कर रखा है जोश मे,
"आप" ही ने राजनीति को जकड लिया आगोश मे |
"आप' ही "आप" की चर्चा है चारो ओर है,
"आप" ही अब सत्य हो और "आप" ही असत्य हो,
"आप" ही किरदार हो और "आप" ही सूत्रधार हो |
"आप" ही ने घोटालो का करना पर्दाफ़ास था,
"आप" ही ने भ्रष्टाचारियो को करना खल्लास था,
अब "आप" भी उस जमात मे शुमार है,
अब "आप" भी दगियों के साथ हो,
अब "आप" भी भ्रस्टाचारियों के साथ हो,
अब "आप" भी देश का भूगोल लगे बिगाड़ने हो,
अब "आप" चंदे के लिये विरोधियों को लगे पछाड़ने हो |
"आप" का चरित्र अब लगा होने संदिग्ध है,
क्योंकि अब "आप" आप ना रहे,
अब "आप" "राप" हो गये |
(राप: राजनीतिक पार्टी) 

http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/politics-today/entry/%E0%A4%86%E0%A4%AA-%E0%A4%B8-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B92

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