Wednesday, June 19, 2013

मोदी को घेरने आए थे, खुद की पैंट गीला कर गए मोंटेक

मोदी को घेरने आए थे, खुद की पैंट गीला कर गए मोंटेक

नई दिल्ली। भरसक कोशिश और पूरी तैयारी के बावजूद योजना आयोग की बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की केंद्र सरकार और कांग्रेस की कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं। भरपूर विकास के बावजूद सामाजिक संकेतकों यानी समाज के पिछड़े, महिला और बच्चों के मामले में यथोचित सुधार न होने के मुद्दे पर मोदी को आयोग के सदस्यों ने घेरा। मोदी ने हर क्षेत्र में उनके सवालों के जवाब अपने अफसरों से दिलाए और आखिर में केंद्र के आंकड़ों को ही तार-तार कर दिया।


योजना आयोग की बैठक में मोदी का स्वागत करते मोंटेक व शुक्ला

गुजरात की वार्षिक योजना के लिए दिल्ली आए मोदी के लिए आयोग ने कुछ ज्यादा ही इंतजाम किए थे। अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आने पर मीडिया के योजना आयोग दफ्तर में रुकने पर पाबंदी नहीं होती थी, लेकिन मोदी का दबाव सरकार के सिर इस कदर तारी था कि मीडिया को आयोग के बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं योजना आयोग की बैठक में सदस्यों और संबंधित लोगों के अलावा कांग्रेस के सोशल मीडिया अभियान को देखने वाले एक तेज तर्रार मंत्री के विशेष कार्याधिकारी भी मौजूद थे। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पप्पू बताने के जवाब में सोशल मीडिया में मोदी को फेंकू ठहराने वाले अभियान के मुख्य कर्ताधर्ता इन हजरत की मौजूदगी भी चर्चा का विषय थी। यह विशेष कार्याधिकारी कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के लिए बने वार रूम में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

दरअसल, हर बार दिल्ली आकर केंद्र पर विकास और नई दृष्टि न होने का आरोप लगाकर नीचा दिखाने वाले मोदी को उनकी ही तरह आंकड़ों के जाल में फंसाने के लिए सरकार की पूरी तैयारी का यह हिस्सा भर था। इस साल शुरुआत में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में विभिन्न राज्यों के सामाजिक संकेतकों के जो आंकड़े पेश किए गए थे, उन्हीं के आधार पर मोदी को घेरने की तैयारी थी। इनके मुताबिक गुजरात में विकास के अनुरूप पिछड़े तबके, अनुसूचित जाति व जनजाति, मातृ-शिशु वृद्धि व स्वास्थ्य दर में सुधार नहीं है। इन मोर्चो पर गुजरात देश के कई राज्यों से पिछड़ा नजर आता है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोदी को इन्हीं मुद्दों पर घेरा गया।

शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक हर क्षेत्र में उठाए गए सवालों के जवाब मोदी ने खुद देने के बजाय अपने संबंधित विभाग के अधिकारियों से दिलाए। आखिर में अपना लंबा विजुअल प्रेजेंटेशन देते समय मोदी कांग्रेस की तरफ से की गई पूरी घेरेबंदी को तार-तार कर गए। उन्होंने माना कि विकास के मुताबिक सामाजिक क्षेत्र में काम करने की जरूरत है, लेकिन केंद्र के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा गए। उन्होंने कहा कि इसका आकलन करने के लिए कोई एक मुकम्मल स्रोत नहीं है, बल्कि अलग-अलग जगहों से आंकड़े उठाए गए हैं और वे भी बेहद पुराने हैं। इन आंकड़ों के सहारे इस फैसले पर नहीं पहुंचा जा सकता कि गुजरात का प्रदर्शन खराब है और दूसरे का अच्छा। उन्होंने उलटे पूछा कि गुजरात अपने यहां 42 फीसद धन सामाजिक क्षेत्र में खर्च कर रहा है।

मोदी ने पूछा, ‘केंद्र बताए कि वह खुद और अन्य राज्य में कौन कितना बजट सामाजिक योजनाओं पर खर्च कर रहे हैं।’ उन्होंने दावा किया कि 2020 तक गुजरात इस क्षेत्र में भी नंबर वन होगा, चाहे केंद्र कहीं से भी आंकड़े जुटाए। उन्होंने एनसीटीसी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र पर राज्यों के ऊपर कानून थोपने का आरोप भी मढ़ा। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे में यह नहीं चल सकता कि हम कानून बनाएंगे और तुमको अमल करना ही होगा।

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