Thursday, June 27, 2013

कैसे आया लाखो क्यूसेक पानी एक साथ पहाड़ियों से ?



यह पोस्ट अवश्य पढ़े , हो सके तो मित्रों के साथ सांझा (Share) करे | यह पोस्ट तथ्यों पर आधारित है , आकड़ों में थोडा असंतुलन हो सकता है किन्तु तथ्य पूर्ण रूपेण सत्य है , जिसको आपत्ति हो वो विश्व की किसी भी संस्था से इसकी निष्पक्ष जांच करा सकता है ||

आपदा प्रबंधन के लिए १००० करोड़ केंद्र सरकार से |
आपदा प्रबंधन के लिए ३७८ करोड़ अन्य राज्यों और सामाजिक सस्थाओं से |
आपदा प्रबंधन के लिए अब तक १०० से ज्यादा ट्रक राहत सामग्री |
आपदा प्रबंधन के लिए सेना के हैलिकोप्टर , सेना के जवान |
आपदा प्रबंधन में सामाजिक , राजनैतिक और भगवा आतंकवादी संगठनो की आर्थिक और शरीरिक सहायता |

उत्तराखंड की सरकार ने क्या किया अब तक ??

उत्तराखंड ने आये हुए पैसे से अपनी बहु बेटियों दामाद को हैलिकोप्टर की सैर करायी |
1000 करोड़ में से 900 करोड़ आने वाले दिनों में खा जायेगे |
मृतकों के शरीर पर धारण हीरे ,स्वर्ण, चांदी के आभूषण उनके अंग काट कर निकाल लिए गए |
मृतकों के वस्त्रों में रखा धन , और कीमती सामान खा गए |
हज़ारो मृतकों के पार्थिव शरीर को जंगलों में फिकवा दिया |
हज़ारो पार्थिव शरीरों को पानी के बहाव में बहा दिया |
हज़ारो जीवित लोगो को भूख और प्यास से तडफाया |
हजारो जीवित लोगो से बदसलूकी की गयी |
मोदी जी को अपमानित किया गया |
मोदी जी के द्वारा सहायत की पेशकश को ठुकरा गया |
हरिद्वार में लगे बाबा रामदेव जी के सहायता शिविर को बल पूर्वक हटा दिया गया |

कैसे आया लाखो क्यूसेक पानी एक साथ पहाड़ियों से ?

बारिश से आया पानी तो रिस रिस कर आता ना की एक साथ वेग के साथ ?
क्यों बदली कई मुख्य नदियों ने अपनी दिशा जबकि नदी के आस पास का क्षेत्र असीम है और उसमे लाखो क्यूसेक पानी समाहित हो कर एक ही दिशा में बह सकता है ?

असल में केंद्र और उत्तराखंड सरकार उत्तराखंड और हिमालय से प्रवाहित होने वाली नदियों पर हर ३० से ८० किलोमीटर के अन्तराल पर डैम बना रही है जिससे विधुत पैदा की जा सके | याद रहे की धारी देवी मंदिर को भी केवल बाँध की वजह से हटाया जा रहा है क्योकि मंदिर के ऊपर से बाँध को ले जाया जाना है | अब सरकार को इस विधुत को पैदा करने और नदियों के पानी को विधुत पैदा करने के लिए ना जाने क्यों रोक कर रखा जाना आवश्यक लगा | जिसके लिए उत्तराखंड और केंद्र सरकार ने इन बांधों के साथ साथ 267 टनल (गुफा) पहाड़ियों को काटकर बनायीं , जिसके लिए विस्फोट का सहारा लिया गया , आये दिन हर घंटे इन पहाड़ियों में एक ना एक विस्फोट किया जाने लगा जिससे पहाड़ियों का निचला और उपरी भाग काफी क्षतिग्रस्त हो गया या कमजोर पड़ गया | जिन 267 टनल्स को बनाया जा रहा है उनमे से 39 टनल्स बन कर तैयार हो चुकी थी और उनमे लाखो क्यूसेक पानी बिजली पैदा करने के लिए रोक कर रखा गया था | जिस दिन उत्तराखंड में तेज वर्षा हुयी उस दिन इन 39 टनल्स पर वर्षा जल की वजह से दबाब बढ़ गया , और वो क्षतिग्रस्त होने लगी , बाँध और टनल्स बना रही निजी कम्पनियों को अपना करोडो रूपया डूबता दिखने लगा , इसलिए उत्तराखंड सरकार से मिलीभगत करके निजी कम्पनियों ने एक के बाद एक उन 39 टनल्स का लाखो क्यूसेक पानी छोड़ दिया , जिस कारण लाखो क्यूसेक जल वेग के साथ पहले से ही हो रही वर्षा के जल के साथ मिल गया जिससे यह भयानक तबाही मच गयी ||
अभी तक के प्राप्त गैर सरकारी आकड़ों के हिसाब से करीब ३० हज़ार लोगो की मौत हुयी है जिसे सरकार केवल ८२२ मौते बता रही है |

वर्षा जल से हथनीकुंड बैराज से जब पानी दिल्ली के लिए छोड़ा गया तो हरियाणा और दिल्ली दोनों स्थानों पर वर्षा हो रही थी , क्योकि इससे पहले हरियाणा ने पानी को हरियाणा में रोक कर रखा था और जब वर्षा जल की अधिकता के कारण हरियाणा ने ६ लाख क्यूसेक पानी दिल्ली की ओर छोड़ा तो केवल ३ घंटे में तीव्र वेग के साथ यमुना खतरे के निशान पर बहने लगी | अब सोचिये एक टनल में अगर 2 लाख क्यूसेक पानी भी जमा था तो 39 टनल्स में 78 लाख क्यूसेक पानी जब पहाड़ से निचे गिरता हुआ आएगा तो कुछ बचेगा क्या ??

वर्ष २०१२ और जनवरी 2013 को नेशनल ज्युलोजिकल सर्वे ऑफ़ इण्डिया ने उत्तराखंड में अंधाधुंध बन रहे बांधों को लेकर चिंता जताई थी और 109 गावों को अति असुरक्षित दायरे में रखा था , साथियों इन 109 गावों में से 70 गावों का वजूद समाप्त हो चुका है | और सरकार कह रही है की सिर्फ ८२२ लोग मरे है और आकड़ा 1000 पार कर सकता है , अगर एक गावं में रहने वालों की संख्या २०० भी लगा लूँ तो १४००० ग्रामवासी लापता है और हजारो श्रद्धालु अलग ||

यही सब छुपा कर रखना चाह रही थी उत्तराखंड सरकार | इसीलिए सेना को बुलाने में दो दिन लग गए , इसीलिए बचाव कार्य ३ दिन बाद धीरे धीरे शुरू किया गया , इसीलिए मोदी जी को प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने दिया गया |

आकड़ों में थोडा असंतुलन हो सकता है किन्तु सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता ||

जय जय सियाराम ,, जय जय महाकाल ,, जय जय माँ भारती ,, जय जय माँ भारती के लाल ||

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