Saturday, June 1, 2013

च मुस्लिम जनसंख्या बढ़ोतरी का प्रतिशत

मित्रों, आपको याद होगा कि २०११ की जनगणना के समय फ़ार्म में कॉलम क्रमांक सात में "धर्म" वाला कॉलम भी था, जिस पर काफी बवाल हुआ था. भाजपा और अन्य पार्टियों ने धार्मिक आधार पर जनगणना की आलोचना भी की थी. अंत में सरकार ने उस जानकारी को "स्वैच्छिक" बना दिया.

हाल ही में जनगणना २०११ के आरंभिक आँकड़े गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने जारी किए हैं. इन जारी किए गए आंकड़ों में सरकार ने "धर्म" सम्बन्धी आँकड़े छिपा लिए हैं. उल्लेखनीय है कि 1981 से 1991 के बीच मुस्लिम जनसंख्या बढ़ोतरी का प्रतिशत ३० से बढकर ३६ हुआ था, जबकि हिन्दू जनसंख्या "ग्रोथ रेट" २३ से घटकर २० प्रतिशत हुआ था.

1909 में कर्नल यूएन मुखर्जी ने एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें 1881, 1891 और 1901 के जनसँख्या आंकड़ों को लेकर हिंदुओं की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की थी. जनसँख्या के इस गहन विश्लेषण की रिपोर्ट आर्य समाज के स्वामी श्रद्धानंद को दिखाई गई, जिसके बाद उन्होंने "शुद्धि" और "संगठन" का कार्य आरम्भ किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंग्रेजों ने जनगणना में "धर्म" का कॉलम ही हटवा दिया.

2011 की जनगणना में "धर्म" के आँकड़े शामिल हैं. भले ही यह फ़ार्म भरने वाले की मर्जी पर अर्थात "स्वैच्छिक" था, परन्तु फिर भी इन आंकड़ों से देश को यह पता चलेगा कि वास्तव में हिंदुओं की "ग्रोथ रेट" क्या है? मुसलमानों की ग्रोथ रेट तथा शिक्षा का स्तर एवं ईसाईयों की संख्या में पिछले दशक में कितनी वृद्धि हुई है?

ज़ाहिर है कि मामला टेढ़ा है और गंभीर भी. सरकार इन आंकड़ों को छिपाने की पूरी कोशिश करेगी, ताकि "हिन्दू नाम रखकर" समाज के बीच छिपे बैठे असली-नकली ईसाईयों की पोल न खुल जाए. कश्मीर, असम, पश्चिम बंगाल, केरल व उत्तरप्रदेश में तेजी से बढ़ रही मुस्लिम आबादी को लेकर "धर्म" सम्बन्धी इन आंकड़ों का जारी होना अब बहुत जरूरी हो गया है....

उम्मीद करता हूँ कि यह बात अधिकाधिक लोगों तक पहुँचेगी तथा शीर्ष नेताओं पर इस हेतु दबाव बनेगा... आम "हिन्दू" व्यक्ति को यह जानने का पूरा हक है, क्योंकि यह मामला उसकी अगली पीढ़ी को प्रभावित करने वाला है...

साभार : सुरेश चिपलूनकर
मित्रों, आपको याद होगा कि २०११ की जनगणना के समय फ़ार्म में कॉलम क्रमांक सात में "धर्म" वाला कॉलम भी था, जिस पर काफी बवाल हुआ था. भाजपा और अन्य पार्टियों ने धार्मिक आधार पर जनगणना की आलोचना भी की थी. अंत में सरकार ने उस जानकारी को "स्वैच्छिक" बना दिया. 

हाल ही में जनगणना २०११ के आरंभिक आँकड़े गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने जारी किए हैं. इन जारी किए गए आंकड़ों में सरकार ने "धर्म" सम्बन्धी आँकड़े छिपा लिए हैं. उल्लेखनीय है कि 1981 से 1991 के बीच मुस्लिम जनसंख्या बढ़ोतरी का प्रतिशत ३० से बढकर ३६ हुआ था, जबकि हिन्दू जनसंख्या "ग्रोथ रेट" २३ से घटकर २० प्रतिशत हुआ था. 

1909 में कर्नल यूएन मुखर्जी ने एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें 1881, 1891 और 1901 के जनसँख्या आंकड़ों को लेकर हिंदुओं की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की थी. जनसँख्या के इस गहन विश्लेषण की रिपोर्ट आर्य समाज के स्वामी श्रद्धानंद को दिखाई गई, जिसके बाद उन्होंने "शुद्धि" और "संगठन" का कार्य आरम्भ किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंग्रेजों ने जनगणना में "धर्म" का कॉलम ही हटवा दिया. 

2011 की जनगणना में "धर्म" के आँकड़े शामिल हैं. भले ही यह फ़ार्म भरने वाले की मर्जी पर अर्थात "स्वैच्छिक" था, परन्तु फिर भी इन आंकड़ों से देश को यह पता चलेगा कि वास्तव में हिंदुओं की "ग्रोथ रेट" क्या है? मुसलमानों की ग्रोथ रेट तथा शिक्षा का स्तर एवं ईसाईयों की संख्या में पिछले दशक में कितनी वृद्धि हुई है? 

ज़ाहिर है कि मामला टेढ़ा है और गंभीर भी. सरकार इन आंकड़ों को छिपाने की पूरी कोशिश करेगी, ताकि "हिन्दू नाम रखकर" समाज के बीच छिपे बैठे असली-नकली ईसाईयों की पोल न खुल जाए. कश्मीर, असम, पश्चिम बंगाल, केरल व उत्तरप्रदेश में तेजी से बढ़ रही मुस्लिम आबादी को लेकर "धर्म" सम्बन्धी इन आंकड़ों का जारी होना अब बहुत जरूरी हो गया है.... 

उम्मीद करता हूँ कि यह बात अधिकाधिक लोगों तक पहुँचेगी तथा शीर्ष नेताओं पर इस हेतु दबाव बनेगा... आम "हिन्दू" व्यक्ति को यह जानने का पूरा हक है, क्योंकि यह मामला उसकी अगली पीढ़ी को प्रभावित करने वाला है... 

साभार : सुरेश चिपलूनकर

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